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खाली पद होने से प्रमोशन का हक नहीं : कैट
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- अभियोजन अधिकारी के पदोन्नति दावे पर तीन महीने में फैसला करे सरकार
जम्मू। सरकारी पद खाली होने से कर्मचारी को अपने आप पदोन्नति का अधिकार नहीं मिल जाता लेकिन नियमों के तहत पात्र कर्मचारी के दावे पर विचार करना जरूरी है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने अभियोजन विभाग के अधिकारी सुभाष चंदर शर्मा की पदोन्नति के दावे पर सरकार को नए सिरे से विचार करने और तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया है।
शर्मा ने 2015 से ज्वाइंट डायरेक्टर, अभियोजन और जुलाई 2022 से डायरेक्टर, अभियोजन के पद पर पिछली तारीख से पदोन्नति मांगी थी। पीठ ने साफ किया कि सीधे पदोन्नति देने के बजाय पहले पात्रता की जांच करनी होगी। शर्मा को दिसंबर 2013 में डिप्टी डायरेक्टर, अभियोजन का इंचार्ज बनाया गया था। सरकार ने कैट में कहा कि यह नियमित पदोन्नति नहीं थी। बाद में 30 दिसंबर 2022 को उन्हें इस पद पर नियमित किया गया। पीठ ने निर्देश दिया कि भर्ती नियमों के अनुसार जांच की जाए कि इंचार्ज के रूप में उनकी सेवा को आगे की पदोन्नति के लिए जरूरी सेवाकाल में गिना जा सकता है या नहीं।
कैट ने कहा कि पदोन्नति के लिए वरिष्ठता, जरूरी सेवाकाल, रिक्त पदों और संबंधित नियमों को ध्यान में रखना होगा। शर्मा के मामले में पात्रता बनती है तो उनका दावा विभागीय पदोन्नति समिति या नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। पीठ ने सीधे पदोन्नति देने से इनकार करते हुए कहा कि खाली पद, लंबी सेवा या पदक अपने आप पदोन्नति का अधिकार नहीं देते। सरकार को आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर कारण सहित अपना निर्णय अधिकारी को बताना होगा। जेएनएफ
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जम्मू। सरकारी पद खाली होने से कर्मचारी को अपने आप पदोन्नति का अधिकार नहीं मिल जाता लेकिन नियमों के तहत पात्र कर्मचारी के दावे पर विचार करना जरूरी है। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) की जम्मू पीठ ने अभियोजन विभाग के अधिकारी सुभाष चंदर शर्मा की पदोन्नति के दावे पर सरकार को नए सिरे से विचार करने और तीन महीने में फैसला लेने का निर्देश दिया है।
शर्मा ने 2015 से ज्वाइंट डायरेक्टर, अभियोजन और जुलाई 2022 से डायरेक्टर, अभियोजन के पद पर पिछली तारीख से पदोन्नति मांगी थी। पीठ ने साफ किया कि सीधे पदोन्नति देने के बजाय पहले पात्रता की जांच करनी होगी। शर्मा को दिसंबर 2013 में डिप्टी डायरेक्टर, अभियोजन का इंचार्ज बनाया गया था। सरकार ने कैट में कहा कि यह नियमित पदोन्नति नहीं थी। बाद में 30 दिसंबर 2022 को उन्हें इस पद पर नियमित किया गया। पीठ ने निर्देश दिया कि भर्ती नियमों के अनुसार जांच की जाए कि इंचार्ज के रूप में उनकी सेवा को आगे की पदोन्नति के लिए जरूरी सेवाकाल में गिना जा सकता है या नहीं।
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कैट ने कहा कि पदोन्नति के लिए वरिष्ठता, जरूरी सेवाकाल, रिक्त पदों और संबंधित नियमों को ध्यान में रखना होगा। शर्मा के मामले में पात्रता बनती है तो उनका दावा विभागीय पदोन्नति समिति या नियमों के तहत सक्षम प्राधिकारी के सामने रखा जाए। पीठ ने सीधे पदोन्नति देने से इनकार करते हुए कहा कि खाली पद, लंबी सेवा या पदक अपने आप पदोन्नति का अधिकार नहीं देते। सरकार को आदेश मिलने के तीन महीने के भीतर कारण सहित अपना निर्णय अधिकारी को बताना होगा। जेएनएफ
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