{"_id":"618ada57cd13c8493e68176c","slug":"court-jammu-city-news-jmu247513939","type":"story","status":"publish","title_hn":"गैर पंजीकृत डेयरियों पर रिपोर्ट नहीं देने पर निगम को जुर्माना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गैर पंजीकृत डेयरियों पर रिपोर्ट नहीं देने पर निगम को जुर्माना
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जम्मू। अवैध रूप चलने वाली डेयरियों और गौशालाओं पर नगर निगम के रवैये से उच्च न्यायालय खासा नाराज है। इसे लेकर निगम की ओर से रिपोर्ट पेश की जानी थी, लेकिन पेश नहीं की गई। इस पर कड़ा एतराज जताते हुए उच्च न्यायालय ने निगम पर 15 हजार रुपये जुर्माना लगाया। निगम आयुुक्त को इसे लेकर हलफनामा भी दायर करने के लिए कहा गया है। यदि ऐसा नहीं हुआ तो आयुक्त निजी तौर पर पेश होंगे।
मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता वाली खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। सेव नाम की एनजीओ की अध्यक्ष रंपी मदान ने इसे लेकर याचिका दायर की थी। खंडपीठ ने निगम को दो हफ्तों के भीतर अपना जवाब देने और इससे पहले 15 हजार रुपये जमा कराने को कहा। इससे पहले एडवोकेट एसएस अहमद ने न्यायालय को बताया कि निगम अपंजिकृत डेयरियों को लेकर गंभीर नहीं है। निगम को इसे लेकर रिपोर्ट पेश करनी थी। इसे लेकर न्यायलाय ने आदेश भी दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। निगम के वकील हर्षवर्धन ने दलील दी कि इस दौरान बहुत से बदलाव हुए, जिसकी वजह से रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। हालांकि इस दलील को दरकिनार करते हुए खंडपीठ ने निगम पर जुर्माना लगाया।
वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक माह में मांगी रिपोर्ट
उच्च न्यायालय ने वन विभाग से अतिक्रमण पर एक महीने के भीतर ताजा रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसमें बताना होगा कि कितने कनाल वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या बंदोबस्त किए गए हैं। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता वाली खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। इससे पहले जब यह मामला न्यायालय पहुंचा था। तब 127 अतिक्रमण को चिह्नित किया गया था। पुंछ में अतिक्रमण हटाने के लिए एसएसपी को आदेश भी दिया गया था कि वह अतिक्रमण हटाने में वन विभाग की मदद करें। वहीं सरकारी पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आदेश मिलने के बाद पिछले साल पुंछ में 12 अतिक्रमणकारियों से 409 कनाल जमीन छुड़ाई गई थी। इस पर न्यायालय ने कहा कि पिछली रिपोर्ट में यह बताया ही नहीं गया कि अभी कितने अतिक्रमण बाकी है। न ही यह बताया गया कि किस किस जगह अतिक्रमण हटाया गया। लिहाजा नए सिरे से संपूर्ण रिपोर्ट पेश करें।
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मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता वाली खंडपीठ ने इस मामले से जुड़ी याचिका पर सुनवाई की। सेव नाम की एनजीओ की अध्यक्ष रंपी मदान ने इसे लेकर याचिका दायर की थी। खंडपीठ ने निगम को दो हफ्तों के भीतर अपना जवाब देने और इससे पहले 15 हजार रुपये जमा कराने को कहा। इससे पहले एडवोकेट एसएस अहमद ने न्यायालय को बताया कि निगम अपंजिकृत डेयरियों को लेकर गंभीर नहीं है। निगम को इसे लेकर रिपोर्ट पेश करनी थी। इसे लेकर न्यायलाय ने आदेश भी दिया था, लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। निगम के वकील हर्षवर्धन ने दलील दी कि इस दौरान बहुत से बदलाव हुए, जिसकी वजह से रिपोर्ट पेश नहीं की जा सकी। हालांकि इस दलील को दरकिनार करते हुए खंडपीठ ने निगम पर जुर्माना लगाया।
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वन भूमि पर अतिक्रमण को लेकर एक माह में मांगी रिपोर्ट
उच्च न्यायालय ने वन विभाग से अतिक्रमण पर एक महीने के भीतर ताजा रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इसमें बताना होगा कि कितने कनाल वन भूमि से अतिक्रमण हटाया गया है और भविष्य में इसे रोकने के लिए क्या बंदोबस्त किए गए हैं। मंगलवार को मुख्य न्यायाधीश पंकज मित्थल और न्यायाधीश पुनीत गुप्ता वाली खंडपीठ ने मामले पर सुनवाई की। इससे पहले जब यह मामला न्यायालय पहुंचा था। तब 127 अतिक्रमण को चिह्नित किया गया था। पुंछ में अतिक्रमण हटाने के लिए एसएसपी को आदेश भी दिया गया था कि वह अतिक्रमण हटाने में वन विभाग की मदद करें। वहीं सरकारी पक्ष ने न्यायालय को बताया कि आदेश मिलने के बाद पिछले साल पुंछ में 12 अतिक्रमणकारियों से 409 कनाल जमीन छुड़ाई गई थी। इस पर न्यायालय ने कहा कि पिछली रिपोर्ट में यह बताया ही नहीं गया कि अभी कितने अतिक्रमण बाकी है। न ही यह बताया गया कि किस किस जगह अतिक्रमण हटाया गया। लिहाजा नए सिरे से संपूर्ण रिपोर्ट पेश करें।
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