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एमएस सर्जरी मामले में अदालत ने लगाया स्टे
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 30 Sep 2014 11:32 AM IST
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रिट कोर्ट के फैसले के खिलाफ डा. शगुन महाजन और अन्य द्वारा दायर एलपीए पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएम कुमार और जस्टिस बंसी लाल भट की खंडपीठ ने फिलहाल एमएस सर्जरी में उनके दाखिले को खारिज किए जाने के फैसले पर स्टे लगा दिया है।
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आवेदन पर गौर करने और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद खंडपीठ ने अगली सुनवाई तक रोक जारी रखी। चीफ जस्टिस द्वारा लिखे रिपोर्टिंग आर्डर की घोषणा करते हुए जस्टिस बंसी लाल भट ने बताया कि तीन आवेदनों में उठाया गया मुद्दा उसकी कानूनी बाध्यता पर घूमता रहा। अदालत ने पाया कि एनआरआई सीट पर दाखिले से कोई कानूनी अड़चन तो नहीं आ रही।
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एलपीए की आवेदक इस बात से व्यथित है कि रिट कोर्ट ने अपने निर्देश में कहा कि उसके एनआरआई चाचा के प्रायोजन से उन्हें दाखिला नहीं मिल सकता, क्योंकि वह सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य केस के पारा 131 के तहत नहीं आता है।
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अदालत का ध्यान इस ओर भी लाया गया कि सीमित संख्या में उपलब्ध इस कोटे में दाखिला दिया जाना चाहिए, क्योंकि एनआरआई कोटे के विद्यार्थियों से मिलने वाला फंड शिक्षा के स्तर को मजबूत करने के साथ शैक्षिक गतिविधियों को बढ़ाने में मददगार होता है।
यह भी दलील दी गई कि विदेशों में जाकर बसने वाले भारतीय अपने बच्चों को देश में वापस लाने को तत्पर हैं। इस कोटे की सीटें, जो 15 फीसदी से भी कम हैं, वे एनआरआई को उपलब्ध करवाई जानी चाहिएं।
खंडपीठ ने पाया कि रिट कोर्ट ने यह स्वीकार नहीं किया कि इस कोटा सीट में एनआरआई की भतीजी को यह लाभ मिलना चाहिए। छात्राओं की व्यथा को देखते हुए शगुन महाजन और अन्य दो स्टूडेंट की एलपीए जमा ली जाती है।