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कोरोना ने फेरा पंचायत उप चुनाव की तैयारियों पर पानी
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जम्मू। कोरोना वायरस के प्रकोप ने केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर में जमीनी स्तर के लोकतंत्र को मजबूत करने से लेकर विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार करने के लिए परिसीमन की कवायद पर पानी फेर दिया है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंचायत उप चुनाव के लिए नई अधिसूचना अप्रैल महीने में जारी हो सकती थी, लेकिन महामारी और लॉकडाउन के चलते अब यह काम ठंडे बस्ते में चला गया है। अब हालात सामान्य होने के बाद नए सिरे से इस संबंध में कवायद शुरू करने पड़ेगी।
वर्तमान समय में कोई भी सामाजिक कार्यक्रम संभव ही नहीं है। इसलिए पंचायत उप चुनाव लंबे अर्से के लिए टलना तय हैं। ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव के लिए जम्मू में रिक्त सरंपचों और पंचों की सीटों के अलावा कश्मीर संभाग में करीब 13 हजार सरपंचों व पंचों की रिक्त सीटों को भरने के लिए चुनाव की तैयारी की गई थी। लेकिन यह सब तैयारियां धरी रह गई हैं।
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दूसरी ओर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिए सबसे अहम विधान सभा चुनाव के लिए आधार बनाने के लिए परिसीमन आयोग का केंद्र सरकार की तरफ से गठन के बावजूद प्रदेश में काम तक शुरू नहीं हो पाया। आयोग की तरफ से प्रदेश का दौरा होना था जो भी अब अनिश्चितकाल के लिए टल चुका है। ऐसे में हालात सामान्य होने के बाद भी परिसीमन आयोग को विधानसभा क्षेत्र स्तर पर अपना काम करने के लिए करीब एक साल का समय चाहिए होगा। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव और लोकतांत्रिक सरकार के गठन में काफी समय लग सकता है और इस साल ऐसी कोई संभावना भी नहीं रह गई है।
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आधिकारिक सूत्रों के अनुसार पंचायत उप चुनाव के लिए नई अधिसूचना अप्रैल महीने में जारी हो सकती थी, लेकिन महामारी और लॉकडाउन के चलते अब यह काम ठंडे बस्ते में चला गया है। अब हालात सामान्य होने के बाद नए सिरे से इस संबंध में कवायद शुरू करने पड़ेगी।
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वर्तमान समय में कोई भी सामाजिक कार्यक्रम संभव ही नहीं है। इसलिए पंचायत उप चुनाव लंबे अर्से के लिए टलना तय हैं। ब्लॉक डेवलपमेंट काउंसिल के चुनाव के लिए जम्मू में रिक्त सरंपचों और पंचों की सीटों के अलावा कश्मीर संभाग में करीब 13 हजार सरपंचों व पंचों की रिक्त सीटों को भरने के लिए चुनाव की तैयारी की गई थी। लेकिन यह सब तैयारियां धरी रह गई हैं।
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दूसरी ओर केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के लिए सबसे अहम विधान सभा चुनाव के लिए आधार बनाने के लिए परिसीमन आयोग का केंद्र सरकार की तरफ से गठन के बावजूद प्रदेश में काम तक शुरू नहीं हो पाया। आयोग की तरफ से प्रदेश का दौरा होना था जो भी अब अनिश्चितकाल के लिए टल चुका है। ऐसे में हालात सामान्य होने के बाद भी परिसीमन आयोग को विधानसभा क्षेत्र स्तर पर अपना काम करने के लिए करीब एक साल का समय चाहिए होगा। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव और लोकतांत्रिक सरकार के गठन में काफी समय लग सकता है और इस साल ऐसी कोई संभावना भी नहीं रह गई है।