न सुरक्षा उपकरण..न ही ट्रेनिंग, खतरे में हैं आशा वर्कर्स, पुलिस पर मारपीट का आरोप
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कोरोना वायरस की महामारी से पूरी दुनिया जूझ रही है, ऐसे में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की 14 हजार आशा वर्कर्स इस समय डोर-टू-डोर अभियान चलाकर लोगों का यात्रा इतिहास पता कर रही हैं।
आशा वर्कर्स का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें न तो कोई ट्रेनिंग दी गई है और न ही सुरक्षा के लिए उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं। साथ ही सैनिटाइजर और मास्क भी खुद के खर्चे से खरीदने को कहा गया है। उनका कहना है कि आशा वर्कर्स को सिर्फ 2000 रुपये प्रति माह दिया जाता है।
पुलिस पर मारपीट का आरोप
अनंतनाग में यात्रा इतिहास पता करने पहुंची एक आशा वर्कर के साथ पुलिसकर्मी द्वारा मारपीट किए जाने का आरोप है। आशा वर्कर का आरोप है कि वह पुलिसकर्मी का यात्रा इतिहास पूछने गई थी। इससे वह आक्रोशित हो गया और उसकी पिटाई की। वहीं इस पर आशा वर्कर्स यूनियन ने प्रशासन से इस हादसे पर गौर कर आशा वर्करों और उनके परिवार को सुरक्षा दिलवाने की अपील की है।