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Jammu Kashmir Corona Update: प्रदेश में फिर कोविड की दस्तक, नहीं चली जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन

Fri, 31 Mar 2023 02:17 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: विमल शर्मा Updated Fri, 31 Mar 2023 02:17 AM IST
सार

जम्मू संभाग के 10 जिलों पर कहीं भी जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन चालू नहीं है। कोविड को लेकर हालात अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन जिस तरह से देश के विभिन्न हिस्सों में इसने रफ्तार पकड़ी है, उससे अप्रैल या मई में संक्रमण बढ़ सकता है।

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Corona knocks again in Jammu Kashmir, genome sequencing machine did not work
जम्मू कश्मीर में कोरोना केस - फोटो : पीटीआई

विस्तार

देश में बढ़ रहे कोविड संक्रमण ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। थोड़े अंतराल के बाद कोविड का नया वेरिएंट लोगों को परेशान कर रहा है। जम्मू संभाग में वायरस के नए वेरिएंट की पहचान के लिए अभी भी दूसरी लेबोरेटरी पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

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एमसीएच (जच्चा-बच्चा) अस्पताल गांधीनगर में 9 महीने पहले जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन स्थापित करने की कवायद शुरू की गई थी, लेकिन अब तक इसे चालू नहीं किया जा सका है। अगर कोविड संक्रमण दोबारा दस्तक देता है तो नए वेरिएंट की पहचान के लिए स्किम सोरा श्रीनगर की लेबोरेटरी पर निर्भर रहना पड़ेगा।
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जम्मू संभाग के 10 जिलों पर कहीं भी जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन चालू नहीं है। हालांकि कोविड को लेकर हालात अभी नियंत्रण में हैं, लेकिन जिस तरह से देश के विभिन्न हिस्सों में इसने रफ्तार पकड़ी है, उससे अप्रैल या मई में संक्रमण बढ़ सकता है।
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इससे पहले सैंपलों को वेरिएंट जांच के लिए दिल्ली के नेशनल सेंटर फाॅर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) में भेजा जा रहा था। मगर अब स्किम सोरा श्रीनगर में यह सुविधा शुरू की गई है। लेकिन मेडिकल काॅलेज जम्मू के साथ श्रीनगर में यह सुविधा शुरू नहीं हो पाई है।

प्रदेश में अधिकारिक तौर पर दिन में 2 से 3 ही कोविड के मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन इससे कई गुणा अधिक लोग संक्रमित हैं। वायरस के नए वेरिएंट की पहचान जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन में होती है।

इसमें नए वेरिएंट की पहचान कर उसकी रोकथाम के लिए जल्द उपाय कर बीमारी पर नियंत्रण किया जाता है, जिससे संक्रमण को फैलने से रोकने में मदद मिलती है। इससे पहले कोविड की 3 लहरों के दौरान जम्मू-कश्मीर से दिल्ली स्थित लेबोरेटरी में भेजे गए जीनोम सैंपलों की रिपोर्ट आने में करीब 1 माह लगता था।

इससे नए वेरिएंट की पहचान न होने से संक्रमण के प्रभाव को कम करने में मदद नहीं मिल पाती है। नए वेरिएंट की पहचान करने की प्रणाली में कुल संक्रमित मामलों में अलग-अलग 5 प्रतिशत आरटीपीसीआर के सैंपल लिए जाते हैं, जिनकी जेनेटिक सीक्वेंसिंग जांच की जाती है। देश-विदेश में अब तक अल्फा, बीटा, डेल्टा, डेल्टा प्लस और ओमिक्राॅन के कई वेरिएंट मिल चुके हैं।

एमसीएच में जीनोम सीक्वेंसिंग मशीन को जल्द शुरू करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए चिकित्सा स्टाफ को प्रशिक्षण दिया गया है। उम्मीद है कि अप्रैल में मशीन को चालू कर दिया जाएगा। -डॉ. शशि सूदन, प्रिंसिपल जीएमसी जम्मू

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