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अलग ओपीडी में देखे जाएंगे आईएलआई मरीज
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जम्मू। कोविड की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए जम्मू संभाग के दस जिलों के अस्पतालों में इंफ्लूजा लक्षण वाले रोगियों (आईएलआई) को अलग ओपीडी में देखा जाएगा। इसके लिए अस्पताल प्रशासनों को सामान्य ओपीडी से अलग आईएलआई केंद्र स्थापित करने को कहा गया है, ताकि अगर कोई संक्रमित मरीज आ जाता है तो वे सामान्य मरीजों से अलग रहेगा। सोमवार से आईएलआई ओपीडी को प्रभावी बनाया जाएगा। कोविड की दूसरी लहर में अलग से ओपीडी की ऐसी व्यवस्था की गई थी।
स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. सलीम उर रहमान की ओर से जारी एक आदेश में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षकों को अस्पतालों में अलग से आईएलआई ओपीडी शुरू करने को कहा गया है। अस्पताल स्टाफ और सामान्य लोगों में बढ़ते संक्रमित मामलों को देखते हुए आईएलआई मरीजों को अलग से देखा जाएगा। आईएलआई रोगियों में अधिकांश खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीज होते हैं। कोविड में भी ऐसे ही लक्षण रहते हैं। इसमें जब रोगी अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर पहुंचेगा तो उससे उसकी बीमारी के लक्षण के बारे में पूछा जाएगा और अगर उसमें आईएलआई लक्षण होते हैं तो उसे विशेष केंद्र में भेज दिया जाएगा। इस केंद्र में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा और ऐसे मरीजों को सामान्य मरीजों के साथ नहीं रहने दिया जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. रहमान के अनुसार ऐसी व्यवस्था से अस्पतालों में कोविड संक्रमण का प्रसार कम होने का खतरा रहेगा। इसके अलावा वरिष्ठ सलाहकार, सलाहकार, मेडिकल अधिकारियों को मरीज की पर्ची पर अपने हस्ताक्षर और स्टांप लगाने को कहा गया है, ताकि मरीज को देख रहे डाक्टरी परामर्श की पारदर्शिता को बढ़ाया जाए।
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स्वास्थ्य निदेशक जम्मू डॉ. सलीम उर रहमान की ओर से जारी एक आदेश में सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और चिकित्सा अधीक्षकों को अस्पतालों में अलग से आईएलआई ओपीडी शुरू करने को कहा गया है। अस्पताल स्टाफ और सामान्य लोगों में बढ़ते संक्रमित मामलों को देखते हुए आईएलआई मरीजों को अलग से देखा जाएगा। आईएलआई रोगियों में अधिकांश खांसी, जुकाम और बुखार वाले मरीज होते हैं। कोविड में भी ऐसे ही लक्षण रहते हैं। इसमें जब रोगी अस्पताल के पंजीकरण काउंटर पर पहुंचेगा तो उससे उसकी बीमारी के लक्षण के बारे में पूछा जाएगा और अगर उसमें आईएलआई लक्षण होते हैं तो उसे विशेष केंद्र में भेज दिया जाएगा। इस केंद्र में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जाएगा और ऐसे मरीजों को सामान्य मरीजों के साथ नहीं रहने दिया जाएगा। स्वास्थ्य निदेशक डॉ. रहमान के अनुसार ऐसी व्यवस्था से अस्पतालों में कोविड संक्रमण का प्रसार कम होने का खतरा रहेगा। इसके अलावा वरिष्ठ सलाहकार, सलाहकार, मेडिकल अधिकारियों को मरीज की पर्ची पर अपने हस्ताक्षर और स्टांप लगाने को कहा गया है, ताकि मरीज को देख रहे डाक्टरी परामर्श की पारदर्शिता को बढ़ाया जाए।
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