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जम्मू में चार माह में 763 लोगों की मौत, पर सीरो सर्वे नहीं हुआ
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जम्मू। कोविड की दूसरी लहर के कहर बरपाने पर भी स्वास्थ्य विभाग ने सबक नहीं लिया है। इस लहर के दौरान चिकित्सा के बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया, लेकिन राजधानी जम्मू जैसे बड़े जिलों में सीरो सर्वे की दरकार है। सीएमओ कार्यालय से स्वास्थ्य विभाग की ओर से चिकित्सा शिक्षा विभाग को सीरो सर्वे के लिए कहा गया है, लेकिन शायद संबंधित विभाग तीसरी लहर के आने का इंतजार कर रहा है।
सीरो सर्वे में आबादी में हर्ड इम्यूनिटी का पता चलता है कि वह कोविड जैसे वायरस से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं। वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक होने पर पीड़ित के शरीर में संबंधित वायरस से लड़ने के लिए एंटीबाडी तैयार हो जाती है, लेकिन जम्मू जिले में अभी यह ही नहीं पता है कि यहां की जनसंख्या इसके लिए कितनी तैयार है। ऐसे में भविष्य में डेल्टा जैसे वैरिएंट भारी तबाही मचा सकते हैं।
जून से जम्मू-कश्मीर में कोविड संक्रमण मामलों में लगातार गिरावट आई है। सीरो सर्वे के लिए यह समय उचित था कि जिसमें देखा जाए कि कितनी आबादी कोविड जैसे संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार हुई है। सीरो सर्वे का उद्देश्य यह होता है कि नतीजों में यहां कम दर मिलती है, वहां कोविड उपयुक्त व्यवहार, टीकाकरण और अन्य दूसरे उपाय करके संक्रमण के प्रसार को फैलने से रोका जाता है। गत मार्च से अब तक (6 जुलाई तक) जिला जम्मू में प्रदेश स्तर पर सबसे अधिक 763 संक्रमित मरीजों की मौत हुई और 27 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए। इसमें मई में कोविड संक्रमण के पीक पर रहने पर प्रतिदिन 70 से अधिक लोगों ने जान गंवाई, लेकिन जिले की आबादी में कोविड एंटीबाडी के विस्तार पर अभी कयास ही लगाए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि संक्रमण के प्रसार में भारी गिरावट और पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ होने पर भी सीरो सर्वे में देरी क्यों की जा रही है। संक्रमण का दोबारा प्रसार होने पर सीरो सर्वे करवाना मुश्किल होगा, क्योंकि उसके लिए अतिरिक्त चिकित्सा स्टाफ को लगाने के साथ चिकित्सा बुनियादी ढांचा मजबूत बनाना पड़ता है।
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जम्मू में जल्द करवाएंगे सीरो सर्वे-अतिरिक्त मुख्य सचिव
स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि जम्मू में सीरो सर्वे के लिए जीएमसी जम्मू प्रशासन को कहा गया है और इसे जल्द शुरू करवाया जाएगा। कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाया जा रहा है।
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सीरो सर्वे में आबादी में हर्ड इम्यूनिटी का पता चलता है कि वह कोविड जैसे वायरस से लड़ने के लिए कितने तैयार हैं। वायरस से संक्रमित होने के बाद ठीक होने पर पीड़ित के शरीर में संबंधित वायरस से लड़ने के लिए एंटीबाडी तैयार हो जाती है, लेकिन जम्मू जिले में अभी यह ही नहीं पता है कि यहां की जनसंख्या इसके लिए कितनी तैयार है। ऐसे में भविष्य में डेल्टा जैसे वैरिएंट भारी तबाही मचा सकते हैं।
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जून से जम्मू-कश्मीर में कोविड संक्रमण मामलों में लगातार गिरावट आई है। सीरो सर्वे के लिए यह समय उचित था कि जिसमें देखा जाए कि कितनी आबादी कोविड जैसे संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार हुई है। सीरो सर्वे का उद्देश्य यह होता है कि नतीजों में यहां कम दर मिलती है, वहां कोविड उपयुक्त व्यवहार, टीकाकरण और अन्य दूसरे उपाय करके संक्रमण के प्रसार को फैलने से रोका जाता है। गत मार्च से अब तक (6 जुलाई तक) जिला जम्मू में प्रदेश स्तर पर सबसे अधिक 763 संक्रमित मरीजों की मौत हुई और 27 हजार से अधिक लोग संक्रमित हुए। इसमें मई में कोविड संक्रमण के पीक पर रहने पर प्रतिदिन 70 से अधिक लोगों ने जान गंवाई, लेकिन जिले की आबादी में कोविड एंटीबाडी के विस्तार पर अभी कयास ही लगाए जा रहे हैं। सवाल यह उठता है कि संक्रमण के प्रसार में भारी गिरावट और पर्याप्त चिकित्सा स्टाफ होने पर भी सीरो सर्वे में देरी क्यों की जा रही है। संक्रमण का दोबारा प्रसार होने पर सीरो सर्वे करवाना मुश्किल होगा, क्योंकि उसके लिए अतिरिक्त चिकित्सा स्टाफ को लगाने के साथ चिकित्सा बुनियादी ढांचा मजबूत बनाना पड़ता है।
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जम्मू में जल्द करवाएंगे सीरो सर्वे-अतिरिक्त मुख्य सचिव
स्वास्थ्य व चिकित्सा शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने कहा कि जम्मू में सीरो सर्वे के लिए जीएमसी जम्मू प्रशासन को कहा गया है और इसे जल्द शुरू करवाया जाएगा। कोविड की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत बनाया जा रहा है।