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कोरोना का कहर: जम्मू-कश्मीर में नहीं है बार काउंसिल, आर्थिक तंगी से जूझ रहा वकील तबका
Thu, 17 Jun 2021 09:50 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Thu, 17 Jun 2021 09:50 PM IST
सार
कोरोना के बीच दो साल से बार एसोसिएशन के फंड पर ही निर्भर।
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- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कोरोना की मार अदालतों के कामकाज पर भी पड़ी है। वकील तबका महामारी की वजह से आर्थिक तंगी से जूझ रहा है। उनका कहना है कि यदि जम्मू-कश्मीर में बार काउंसिल होती तो उन्हें आर्थिक तंगी से न जूझना पड़ता। मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में दो बार एसोसिएशन हैं, इनके पास सिर्फ अपना वेलफेयर फंड ही होता है।
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यदि बार काउंसिल होती तो कई तरह की योजनाएं और अन्य लाभ वकीलों तक पहुंचते। बार एसोसिएशन जम्मू के कार्यकारी अध्यक्ष और चुनाव कमेटी के प्रधान सुरिंदर सिंह का कहना है कि इस समय उनके पास सिर्फ बार एसोसिएशन का ही फंड है। दो साल से वकील समुदाय ने बहुत आर्थिक तंगी झेली है। खासकर जो नए वकील हैं, उनके पास कमाने के लिए कोई साधन नहीं है।
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सरकार और हाईकोर्ट से उन्हें नाममात्र ही मदद मिली है। लंबे समय से वे लोग काउंसिल की मांग कर रहे हैं, लेकिन हाईकोर्ट की ओर से इसका गठन नहीं किया गया। मांग उठाई कि जल्द काउंसिल का चुनाव कराएं, ताकि वकीलों की आवाज राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे।
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बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान अभिनव शर्मा का कहना है कि लंबे समय तक बार काउंसिल का चुनाव कराने के लिए नियम तय नहीं हुए थे। अब इसके लिए नियम बना लिए गए हैं। कोविड का दौरा खत्म होगा तो चुनाव होने की संभावना है। बार कांउसिल होती तो कई तरह के फंड और मदद मिल जाती, लेकिन अभी तो वकीलों के लिए बार एसोसिएशन का फंड ही उपलब्ध है, जो प्रदेश के 20 हजार से ज्यादा वकीलों के लिए नाकाफी है।