{"_id":"5b4cf8494f1c1b6f548b4f15","slug":"construction-of-bridge-after-two-decades-youth-of-six-village-in-rajouri-jammu-will-get-married","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"20 साल तक छह गांव में एक पुल की वजह से नहीं हो सकी युवाओं की शादी ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
20 साल तक छह गांव में एक पुल की वजह से नहीं हो सकी युवाओं की शादी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Tue, 17 Jul 2018 01:25 AM IST
विज्ञापन
इस पुल की वजह से 20 साल तक न हो सकी छह गांव के युवाओं की शादी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
करीब दो दशक बाद जिले के धनवां चकली पुल के निर्माण होने से छह गांव के लोगों ने राहत की सांस ली है। इससे अब नाले में बाढ़ आने पर भी विद्यार्थी स्कूल-कॉलेज जा सकेंगे। इतना ही नहीं पहले इन छह गांवों में पुल नहीं होने से कोई शादी का रिश्ता लेकर नहीं आता था, अब आवागमन सुचारु होने से इन गांवों में भी शादी की शहनाई बजेगी।
स्थानीय निवासी शक्ति शर्मा ने बताया कि धनवां नाले पर धनवां चकली पुल के न होने से चकली, अंदरोला, करदीनू, संगपूर, पोठा, खडारियां आदि गांवों के लोगों के घरों में दूसरे गांवों से कोई रिश्ता नहीं आता था। बरसात के मौसम में नाले में बाढ़ आने से उसे पार करना किसी के बस की बात नहीं थी। इससे गांव में युवकों की शादी नहीं हो पाती थी। शक्ति शर्मा ने कहा कि अब पुल का निर्माण हुआ है, तो हमारे बच्चों की शादियां भी आसानी हो जाएंगी।
विज्ञापन
स्थानीय निवासी शक्ति शर्मा ने बताया कि धनवां नाले पर धनवां चकली पुल के न होने से चकली, अंदरोला, करदीनू, संगपूर, पोठा, खडारियां आदि गांवों के लोगों के घरों में दूसरे गांवों से कोई रिश्ता नहीं आता था। बरसात के मौसम में नाले में बाढ़ आने से उसे पार करना किसी के बस की बात नहीं थी। इससे गांव में युवकों की शादी नहीं हो पाती थी। शक्ति शर्मा ने कहा कि अब पुल का निर्माण हुआ है, तो हमारे बच्चों की शादियां भी आसानी हो जाएंगी।
विज्ञापन
बच्चे बरसात के महीने में नहीं जा पाते थे स्कूल
अंदरोला निवासी समता शर्मा ने बताया कि उक्त पुल के न होने से लोगों को नाले के बीच से गुजर कर जाना पड़ता था। कई लोग नाले में बह कर अपनी जानें भी गंवा चुके हैं। पिछले करीब दो दशक से पुल के निर्माण की मांग की जा रही थी और अब जा कर पुल बन पाया है। स्थानीय निवासी सुमित कुमार ने बताया कि पुल के न होने से हमारे बच्चे उच्च शिक्षा भी सही प्रकार से प्राप्त नहीं कर पा रहे थे।
इन गांवों में कहीं भी कोई हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। हमारे बच्चों को 10वीं कक्षा की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए राजोरी या चिंगस जाना पड़ता है। इसी नाले को पार कर ही वे जाते थे। बारिश होने पर नाले का जलस्तर इतना बढ़ जाता था, कि उनके लिए इसे पार करना संभव नहीं होता था। पुल बनने के बाद इलाके के मरीजों को भी अब आसानी से जिला अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।
इन गांवों में कहीं भी कोई हायर सेकेंडरी स्कूल नहीं है। हमारे बच्चों को 10वीं कक्षा की पढ़ाई के बाद उच्च शिक्षा के लिए राजोरी या चिंगस जाना पड़ता है। इसी नाले को पार कर ही वे जाते थे। बारिश होने पर नाले का जलस्तर इतना बढ़ जाता था, कि उनके लिए इसे पार करना संभव नहीं होता था। पुल बनने के बाद इलाके के मरीजों को भी अब आसानी से जिला अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।