सोनिया के इस दांव ने भाजपा का खेल बिगाड़ा
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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दांव ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा का खेल बिगाड़ दिया है। भाजपा और पीडीपी ने तालमेल कर राज्यसभा की सभी चार सीटें जीतने की योजना बनाई थी लेकिन राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद के मैदान में आने से समीकरण बिखर गए हैं।
सोनिया ने आजाद की जीत को हर हाल में सुनिश्चित करने के लिए नेकां के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को राजी कर लिया है। अब नेकां आजाद की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी। आजाद जम्मू पहुंच चुके हैं। वह बुधवार को नामांकन दाखिल करेंगे। चौथी सीट पर उनकी जीत अब तय मानी जाने लगी है।
दरअसल, उमर और आजाद के रिश्ते ठीक नहीं रहे हैं। उमर ने पहले कहा था कि राज्यसभा सीट के लिए आजाद पीडीपी के मुफ्ती मोहम्मद के पांव भी पकड़ सकते हैं। इस पृष्ठभूमि में आजाद को नेकां का समर्थन लगभग मुश्किल था। लिहाजा, सोनिया ने खुद मोर्चा संभाला।
तीन सीटों पर भाजपा-पीडीपी गठबंधन की जीत तय
राज्यसभा की चार सीटों के लिए 7 फरवरी को चुनाव होना है। चार सीटों के लिए तीन बार वोट पड़ेंगे। इस तरह एक विधायक तीन वोट दे सकेंगे। भाजपा और पीडीपी मिलाकर 53 विधायक हैं। सज्जाद लोन के पीपुल्स कांफ्रेंस को दो और निर्दलीय पवन गुप्ता को मिलाकर यह आंकड़ा 56 पर पहुंचता है।
झंस्कार के निर्दलीय एमएलए बकीर रिजवी को मिलाकर यह गठबंधन 57 तक पहुंच सकता है। इसी तरह कांग्रेस और नेकां के पास 27 विधायक हैं। पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट के हाकिम यासिन, सीपीएम के एम वाई तारिगामी और एमएलए इंजीनियर रशीद को मिलाकर नेकां-कांग्रेस गठबंधन 30 की संख्या तक पहुंच सकता है। पहली और दूसरी सीट पर भाजपा और पीडीपी के एक-एक प्रत्याशी की जीत तय है।
तीसरी और चौथी सीट के लिए एक साथ होने वाले मतदान में भाजपा-पीडीपी गठबंधन के 31 विधायक तीसरी सीट को जीत लेंगे। तब चौथी सीट के लिए उनके पास 26 वोट बचेंगे जबकि आजाद के 30 वोट उनकी जीत पक्का कर सकते हैं। समीकरणों में उलटफेर के बाद अब भाजपा और पीडीपी में से एक पार्टी को एक सीट का त्याग करना पड़ेगा। भाजपा हर हाल में दो सीट पर जीत चाहती है।