जीरो लाइन से सटे गांवों में बनेंगे पक्के बंकर
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भारत-पाकिस्तान अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर आए दिन होने वाली गोलाबारी से ग्रामीणों को महफूज रखने के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके तहत जिले में अंतर्राष्ट्रीय सीमा की जीरो लाइन से सटे 22 गांवों में पक्के बंकर बनाने का खाका तैयार कर लिया गया है।
जिला उपायुक्त कठुआ डॉ. शाहिद इकबाल चौधरी ने पुष्टि करते हुए बताया कि हीरानगर सब डिवीजन के सीमावर्ती इलाके में 22 बंकरों का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। हर बंकर के लिए पांच कनाल भूमि (एक कनाल में लगभग 5440 वर्ग फीट जमीन) चिह्नित कर ली गई है।
बंकर बनाए जाने की मियाद और इस पर आने वाले खर्च का फैसला 20 जनवरी को राज्यपाल की अध्यक्षता में होने वाली यूनिफाइड कमांड की बैठक में लिया जाएगा। पक्के बंकर बनाए जाने में सीमा सुरक्षा बल का सहयोग लिया जाएगा।
22 बंकर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया
जिला प्रशासन द्वारा तैयार किए गए विशेष रेस्क्यू प्लान के तहत 22 बंकर बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। एक बंकर के लिए पांच कनाल भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। यानी प्रत्येक बंकर के लिए पांच कनाल भूमि का इस्तेमाल किया जाएगा।
सूत्रों ने बताया कि यह बंकर फायरिंग से लेकर मोर्टार सहित अन्य तरह की गोलाबारी में ग्रामीणों के लिए कवच का काम करेंगे। बंकर का कवर्ड एरिया दो कनाल होगा, जबकि तीन कनाल भूमि अतिरिक्त व्यवस्थाओं के लिए सुरक्षित रहेगी।
वर्तमान परिस्थितियों में गोलाबारी के दौरान ग्रामीणों के पास गांव में रहते हुए खुद को महफूज रखने का कोई भी विकल्प मौजूद नहीं है। आनन-फानन में या तो उन्हें जान जोखिम में डालकर पलायन करना पड़ता है या फिर सुरक्षा बलों के बुलेट प्रूफ मोबाइल बंकर का इंतजार करना पड़ता है।
दोनों ही सूरत में ग्रामीणों की जान पर बन आती है। पक्के बंकर बनने से ग्रामीण गांव में रहकर ही सुरक्षित स्थान पर पनाह ले सकेंगे।