केंद्र की सख्ती के बाद गिलानी मुद्दे पर मुफ्ती का यू-टर्न
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पाकिस्तान परस्तों ने मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की तुष्टिकरण नीति पर ब्रेक लगा दिया है। मुफ्ती की जिद पर पीडीपी और भाजपा के गठबंधन एजेंडे में कई बिन्दु शामिल किए गए थे जो अलगाववादियों के प्रति नरमी दिखाकर उन्हें वार्ता के टेबल तक लाने की कवायद का हिस्सा थे।
इसी कोशिश में कई कदम आगे बढ़कर मुफ्ती ने शांतिपूर्ण मतदान का भी श्रेय अलगाववादियों, आतंकियों और पाकिस्तान को दे दिया था। हालांकि, बाद में उन्हें सफाई देनी पड़ी।
लेकिन, पाकिस्तान परस्तों ने मुफ्ती की इन कोशिशों पर पानी फेर दिया है। अलगाववादियों की हर सभा में पाकिस्तानी झंडे लहराए जाने के बाद अब मुफ्ती के पास सख्ती के अलावा कोई विकल्प नहीं बच गया है।
मुफ्ती की तुष्टिकरण नीति भाजपा को पची
मुफ्ती की तुष्टिकरण नीति भाजपा को पच नहीं रही थी। लिहाजा, भाजपा और केंद्र सरकार ने सख्त रवैया अपनाकर दबाव बढ़ाया और अब मुफ्ती के लिए अपना एजेंडा लागू करना आसान नहीं रह गया है।
अलगाववादी मसर्रत आलम की रिहाई के बाद उपजी परिस्थितियों ने गठबंधन सरकार को सवालों के घेरे में खड़ा किया था। बाद में पाकिस्तानी झंडा लहराने पर मसर्रत पर फिर पीएसए लगाना मुफ्ती सरकार की मजबूरी हो गई।
इससे पीएसए के तहत जम्मू कश्मीर के जेलों में बंद 17 अन्य अलगाववादियों की रिहाई भी खटाई में पड़ गई। जम्मू कश्मीर की जेलों में फिलहाल 2300 कैदी हैं। इनमें से 343 सजायाफ्ता और 1920 विचाराधीन हैं।
पीएसए के तहत बंद कैदियों में से 17 कश्मीर के अलगाववादी हैं और 20 पाकिस्तानी हैं। विचाराधीन कैदियों में पत्थरबाजों की संख्या भी शामिल है।
मुक्त एलओसी ट्रेड से केंद्र का इनकार
पीडीपी और भाजपा के गठबंधन एजेंडे में एलओसी ट्रेड को बंधनों से मुक्त करना भी शुमार है। मुफ्ती चाहते थे कि कश्मीर और पीओके के बीच लोगों का इस पार से उस पार जाना बंधन मुक्त कर दिया जाए।
वर्तमान में इसके लिए परमिट जारी होता है जिसमें वापसी की अवधि दर्ज होती है। मुफ्ती सरकार के पदभार करने के तुरंत बाद रियासत के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग ने एलओसी से व्यापार के सामानों की संख्या 21 से बढ़ाकर 80 करने की सिफारिश केंद्र सरकार से की थी।
ताजा हालात के बाद केंद्र ने इससे साफ मना कर दिया है। गठबंधन एजेंडे में पीओके से कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए नए रूट भी खोलने की बात कही गई थी लेकिन अब केंद्र ने इसे खारिज कर दिया है।
इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से विमर्श के बाद मुफ्ती सरकार को बाकायदा अवगत करा दिया है। केंद्र के सख्ती रवैये के बाद अब मुफ्ती ने भी यू टर्न लेते हुए अलगाववादियों पर सख्ती शुरू कर दी है।