नेकां-कांग्रेस टकराव से विस सत्र के एजेंडे पर असर
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कांग्रेस और नेशनल कांफ्रेंस के बीच रिश्तों का अजीब दौर चल रहा है। नेकां ने यूपीए से नाता तोड़ लिया है और कांग्रेस विधानसभा चुनाव में अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी है लेकिन रियासत सरकार में दोनों अब भी साथ-साथ हैं।
नतीजतन टकराव अब सरकार के कामकाज पर गहरा असर डाल रहा है। तनातनी इतनी बढ़ गई है कि अगामी 25 अगस्त से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में विधायी कार्य के एजेंडे को अंतिम रूप देने के लिए कैबिनेट की बैठक भी नहीं हो पाई है।
टकराव के कारण कैबिनेट की बैठक को एक माह से टाला जा रहा है। इस बीच रियासत कांग्रेस के अध्यक्ष सैफुद्दीन सोज ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा की गई घोषणाओं पर सवाल खड़े किए हैं। सोज ने कैबिनेट की बैठक बुलाने पर जोर दिया है जबकि नेकां का कहना है कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है।
नेकां के कुशासन को जिम्मदार ठहराया
कांग्रेस और नेकां के बीच तनातनी लोकसभा चुनाव के बाद से ही बढ़ गया था। इस कारण गठबंधन तलाक तक पहुंचा। कांग्रेस अध्यक्ष सोज ने हाल में जब हार के लिए नेकां के कुशासन को जिम्मदार ठहराया तो नेकां इसे पचा नहीं पाई।
नेकां ने समन्वय समिति की बैठक का बहिष्कार किया। इस कारण 10 अगस्त को बैठक नहीं हो पाई। अब सोज ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर मुख्यमंत्री ने पिछड़ों-पहाड़ियों-जाटों को आरक्षण देने का ऐलान किया। यह कांग्रेस के घोषणा पत्र में है और कैबिनेट के समक्ष लंबित है।
उमर को कैबिनेट की बैठक बुलाकर इसे मंजूरी देनी चाहिए। सोज ने कहा कि हम लोकतांत्रिक लड़ाई लड़ रहे हैं। पीएचई मंत्री और कांग्रेस नेता शामलाल शर्मा ने कहा कि पिछड़ों का सर्वे कांग्रेस ने कराया और केंद्र को भी इसके लिए राजी किया।
रिफ्यूजियों के पैकेज पर सीएम कमिटमेंट है जो उन्हें कैबिनेट की अगली बैठक में पूरा करना है। इस मुद्दे पर कांग्रेसी मंत्री पहले कैबिनेट का बहिष्कार कर चुके हैं।
कई मुद्दों के मतभेद ने डुबाई लुटिया
अमर उजाला के बातचीत में सोज ने कहा कि रिफ्यूजियों को पैकेज, नम्बरदारों का मानदेय 700 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये करने और पंच-सरपंचों का मानदेय बढ़ाने जैसे मुद्दे कांग्रेस ने उठाए जो कैबिनेट में लंबित हैं।
कैबिनेट की बैठक बुलाकर उसे मंजूरी देने के बजाए नीतिगत मुद्दों पर ऐलान की परंपरा ठीक नहीं है। अफस्पा की वापसी भी उमर बयान देते रहे हैं जबकि वह खुद यूनिफाइड कांड के सदस्य हैं।
विवाद पर टिप्पणी करते हुए ग्रामीण विकास मंत्री और नेकां के महासचिव अली मोहम्मद सागर ने कहा कि कुछ अच्छा हो रहा है तो उसपर उंगली उठाने के बजाए उसे स्वीकार करना चाहिए। नेकां महासचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री की व्यस्तता के कारण कैबिनेट की बैठक नहीं पाई।
बीच में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दौरा भी था। उमर ने कैबिनेट की जितनी बैठकें की हैं उतनी शायद ही किसी सीएम ने अबतक की है। विधानसभा सत्र से पहले कैबिनेट की बैठक होगी। सीएम जब उचित समझेंगे बैठक बुला लेंगे।