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जान हथेली पर रखकर स्कूल जाते हैं बच्चे

Wed, 15 Oct 2014 12:45 PM IST
Updated Wed, 15 Oct 2014 12:45 PM IST
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Children go to school through deadly way

सितंबर माह में तेज बारिश और बाढ़ में सड़कें और पुल भी बह गए थे। जम्मू के राजोरी में स्कूली बच्चे रस्सों के बने पुल से स्कूल जाने को मजबूर हैं। राज्य सरकार ने जल्द सड़कों की मरम्मत पर पुलों के निर्माण की बात भी कही थी, लेकिन राजोरी के कल्लर क्षेत्र में एक फुटब्रिज को डेढ़ माह बाद भी नहीं बनाया गया है। जानकारी के अनुसार, शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर जम्मू-पुंछ नेशनल हाइवे स्थित कल्लर क्षेत्र में करीब 15 वर्ष पहले बनाया गया फुटब्रिज बाढ़ की भेंट चढ़ गया।

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कल्लर के सरपंच सुशील शर्मा के अनुसार, यह फुटब्रिज कल्लर गांव और राजोरी शहर को करीब 15 छोटे-छोटे गांवों जैसे अंदरोला, चकली, चटयार, पोठा, बारखू, करदूनी, बदानी आदि से जोड़ता है। पुल बहने के बाद कुछ लोगों ने स्थानीय स्तर पर खुद ही नदी पर लोहे के रस्से लगा कर काम चलाना शुरू किया।
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करीब डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी लोग रस्से पर लटक कर ही आर-पार आते-जाते हैं। यहां तक कि स्कूल आने-जाने वाले छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं भी रस्से पर लटक कर जान हथेली पर रखकर नदी पार करते हैं। सरपंच के अनुसार, हर रोज सैकड़ों विद्यार्थी इस रस्से के बने पुल से लटक कर नदी पार कर स्कूल जाते हैं। रस्से पर लटक कर स्कूल जाने में सबसे अधिक परेशानी छात्राओं को पेश आ रही है।
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प्रशासन के पुल के लिए फंड नहीं

Children go to school through deadly way

सरपंच के अनुसार, मानवर तवी नामक यह नदी पाकिस्तान जाती है। इतना ही नहीं सभी गांवों के सैकड़ों लोग हर रोज इसी रस्सी के पुल से आते-जाते हैं। कई लोग शहर में काम करते हैं तो शहर से भी कई शिक्षक इन गांवों के स्कूलों में आते-जाते हैं। उन्होंने बताया कि कई बार लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द पुल के निर्माण की गुहार भी लगाई थी।

हर बार प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा फंड उपलब्ध नहीं होने की बात कह कर टाल दिया गया। इस बारे में जब राजोरी के डीसी जितेंद्र कुमार सिंह से बात की गई तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि प्रशासन के पास पुल निर्माण के लिए फंड उपलब्ध नहीं हैं। प्रशासन ने पुल निर्माण के लिए प्रपोजल बना कर सरकार को भेज दिया गया है।

डीसी ने बताया कि बुधवार से पुल के रास्ते पर कटीली तार लगा कर पैदल चलने पर भी रोक लगा दी जाएगी। स्कूल आने-जाने वाले बच्चे और स्थानीय लोग कालाकोट रूट से आवागमन शुरू करें।

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