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Jammu News: एसएमजीएस अस्पताल में चार साल के बच्चे की मौत, इलाज में लापरवाही का आरोप
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- सैंपल लेते समय दौरा पड़ने से हालत बिगड़ने का अस्पताल का दावा, परिजन बोले- इंजेक्शन लगाते ही बिगड़ी तबीयत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसएमजीएस अस्पताल में चार साल के बच्चे की मौत के बाद उपचार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अखनूर से बुखार की हालत में अस्पताल लाए गए रेयांश ने करीब एक सप्ताह उपचार के बाद वीरवार को दम तोड़ दिया। परिजन ने अस्पताल के एक कर्मी पर उपचार में लापरवाही बरतने और गलत तरीके से सैंपल लेने का आरोप लगाया है।
उनका दावा है कि इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि बच्चे की हालत पहले से गंभीर थी और सैंपल लेते समय उसे दौरा पड़ा था।
अखनूर निवासी शिल्पा ने बताया कि रेयांश उनके भाई का बेटा था। उसे बुखार और उल्टियां होने पर 26 अगस्त की रात एसएमजीएस अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। परिजन का आरोप है कि सैंपल लेने के दौरान कर्मचारी ने बच्चे को काफी दर्द पहुंचाया। इसके बाद कथित तौर पर इंजेक्शन लगाए जाने पर बच्चे ने दर्द की शिकायत की और उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन के अनुसार, डॉक्टरों ने बच्चे को अंदर ले जाकर मुंह में पाइप डालीं, जिससे चोट लगी और खून भी निकला। कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने सैंपल लेने वाले कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कर्मचारी वर्दी में नहीं था और नशे की हालत में लग रहा था। बच्चे की मौत के बाद उसके अस्पताल में नजर नहीं आने का भी आरोप लगाया गया।
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डाॅक्टर बोले- इंजेक्शन नहीं, कैनुला किया गया था
एसएमजीएस अस्पताल के डॉक्टर सुनील ने बताया कि बच्चे को 26-27 अगस्त की रात करीब 12 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उसे चार दिन से बुखार और उल्टियां थीं तथा हालत गंभीर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चे को कोई इंजेक्शन नहीं लगाया गया था, बल्कि कैनुला किया गया था। सैंपल लेते समय बच्चे को दौरा पड़ा, जिससे उसकी हालत बिगड़ी। उसे रिवाइव करने के लिए सीपीआर दिया गया और बाद में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की। मेडिकल सुपरिटेंडेंट दारा सिंह ने कहा कि वह खुद समय-समय पर बच्चे की स्थिति की जानकारी लेते रहे। डॉक्टरों की टीम ने उपचार में निर्धारित स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। एसएमजीएस अस्पताल में चार साल के बच्चे की मौत के बाद उपचार को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। अखनूर से बुखार की हालत में अस्पताल लाए गए रेयांश ने करीब एक सप्ताह उपचार के बाद वीरवार को दम तोड़ दिया। परिजन ने अस्पताल के एक कर्मी पर उपचार में लापरवाही बरतने और गलत तरीके से सैंपल लेने का आरोप लगाया है।
उनका दावा है कि इंजेक्शन लगाने के बाद बच्चे की हालत अचानक बिगड़ी और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि बच्चे की हालत पहले से गंभीर थी और सैंपल लेते समय उसे दौरा पड़ा था।
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अखनूर निवासी शिल्पा ने बताया कि रेयांश उनके भाई का बेटा था। उसे बुखार और उल्टियां होने पर 26 अगस्त की रात एसएमजीएस अस्पताल की इमरजेंसी में लाया गया था। परिजन का आरोप है कि सैंपल लेने के दौरान कर्मचारी ने बच्चे को काफी दर्द पहुंचाया। इसके बाद कथित तौर पर इंजेक्शन लगाए जाने पर बच्चे ने दर्द की शिकायत की और उसकी हालत बिगड़ गई। परिजन के अनुसार, डॉक्टरों ने बच्चे को अंदर ले जाकर मुंह में पाइप डालीं, जिससे चोट लगी और खून भी निकला। कुछ देर बाद बच्चे की मौत हो गई। परिजन ने सैंपल लेने वाले कर्मचारी की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि कर्मचारी वर्दी में नहीं था और नशे की हालत में लग रहा था। बच्चे की मौत के बाद उसके अस्पताल में नजर नहीं आने का भी आरोप लगाया गया।
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डाॅक्टर बोले- इंजेक्शन नहीं, कैनुला किया गया था
एसएमजीएस अस्पताल के डॉक्टर सुनील ने बताया कि बच्चे को 26-27 अगस्त की रात करीब 12 बजे इमरजेंसी में लाया गया था। उसे चार दिन से बुखार और उल्टियां थीं तथा हालत गंभीर थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि बच्चे को कोई इंजेक्शन नहीं लगाया गया था, बल्कि कैनुला किया गया था। सैंपल लेते समय बच्चे को दौरा पड़ा, जिससे उसकी हालत बिगड़ी। उसे रिवाइव करने के लिए सीपीआर दिया गया और बाद में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की। मेडिकल सुपरिटेंडेंट दारा सिंह ने कहा कि वह खुद समय-समय पर बच्चे की स्थिति की जानकारी लेते रहे। डॉक्टरों की टीम ने उपचार में निर्धारित स्टैंडर्ड प्रोटोकॉल का पूरा पालन किया।