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Jammu News: चिकना बाबा की हत्या के 12 साल बाद यूपी के दोषी को उम्रकैद, दो सह आरोपी बरी
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जम्मू। प्रधान सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को राजू गिरी उर्फ चिकना बाबा की हत्या के 12 साल पुराने मामले में दोषी सरवन पांडे को उम्रकैद की सजा सुनाई। सह आरोपी मोहम्मद सलीम खान और पिंटू पासवान को बरी कर दिया है
प्रधान सत्र न्यायाधीश आरएन वट्टल ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी सरवन पांडे को दोषी पाया। उसे शस्त्र अधिनियम के तहत तीन साल कि अतिरिक्त कारावास की सजा भी दी। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। बशर्ते हाईकोर्ट इसे मंजूरी दे।
अदालत ने सह आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि एकमात्र सबूत जले हुए कपड़ों की राख थी जो हत्या में उनकी संलिप्तता साबित करने के लिए अपर्याप्त था।
सरकारी वकील ने दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की। बचाव पक्ष के वकील ने आदतन अपराधी न होते हुए उस पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होने का तर्क देते हुए नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि युवक की इतनी क्रूरता से की गई हत्या कड़ी सजा की हकदार है। हालांकि मामले को दुर्लभतम न मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया।
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अदालत ने मामले का रिकॉर्ड, फैसला और सजा का आदेश जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही दोषी को दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील दायर करने के अधिकार के बारे में भी सूचित किया गया। जेएनएफ
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यह था मामला...
नौ मार्च 2014 को पुलिस को भूतनाथ मंदिर के पास तवी नदी में व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव मिलने की सूचना मिली। उसकी पहचान राजू गिरी उर्फ चिकना बाबा हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से नवाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि पीड़ित का सिर, हाथ और पैर धारदार हथियार से काटे गए थे। शरीर के टुकड़ों को कंबल में लपेटकर भूतनाथ मंदिर के पास नदी में फेंक दिया गया था।
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परिस्थितिजन्य सबूत से साबित हुआ अपराध
अदालत ने माना कि परिस्थितिजन्य सबूत पूरी तरह सरवन पांडे के खिलाफ हैं जो हत्या के मकसद, पीड़ित को आखिरी बार देखे जाने और अपराध में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी से जुड़े थे। हथियार उस मंदिर परिसर से बरामद किए गए थे जहां सरवन पांडे रह रहा था। अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पांडे ने ही चिकना बाबा की हत्या की थी और उसके शरीर के टुकड़े किए थे। चिकना बाबा और सरवन पांडे उर्फ महंत वीर गिरि उर्फ सीताराम बाबा चरस की खरीद-बिक्री के धंधे से जुड़े हुए थे। पैसों को लेकर हुआ विवाद ही हत्या का मकसद था।
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प्रधान सत्र न्यायाधीश आरएन वट्टल ने उत्तर प्रदेश के अयोध्या निवासी सरवन पांडे को दोषी पाया। उसे शस्त्र अधिनियम के तहत तीन साल कि अतिरिक्त कारावास की सजा भी दी। दोनों सजाएं साथ चलेंगी। बशर्ते हाईकोर्ट इसे मंजूरी दे।
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अदालत ने सह आरोपियों को बरी करते हुए कहा कि एकमात्र सबूत जले हुए कपड़ों की राख थी जो हत्या में उनकी संलिप्तता साबित करने के लिए अपर्याप्त था।
सरकारी वकील ने दोषी के लिए मृत्युदंड की मांग की। बचाव पक्ष के वकील ने आदतन अपराधी न होते हुए उस पर परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी होने का तर्क देते हुए नरमी बरतने की अपील की। बचाव पक्ष की याचिका को खारिज करते हुए अदालत ने टिप्पणी की कि युवक की इतनी क्रूरता से की गई हत्या कड़ी सजा की हकदार है। हालांकि मामले को दुर्लभतम न मानते हुए मृत्युदंड देने से इनकार कर दिया।
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अदालत ने मामले का रिकॉर्ड, फैसला और सजा का आदेश जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही दोषी को दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील दायर करने के अधिकार के बारे में भी सूचित किया गया। जेएनएफ
यह था मामला...
नौ मार्च 2014 को पुलिस को भूतनाथ मंदिर के पास तवी नदी में व्यक्ति का क्षत-विक्षत शव मिलने की सूचना मिली। उसकी पहचान राजू गिरी उर्फ चिकना बाबा हुई। इसके बाद पुलिस की ओर से नवाबाद थाने में एफआईआर दर्ज की गई। अभियोजन पक्ष का तर्क था कि पीड़ित का सिर, हाथ और पैर धारदार हथियार से काटे गए थे। शरीर के टुकड़ों को कंबल में लपेटकर भूतनाथ मंदिर के पास नदी में फेंक दिया गया था।
परिस्थितिजन्य सबूत से साबित हुआ अपराध
अदालत ने माना कि परिस्थितिजन्य सबूत पूरी तरह सरवन पांडे के खिलाफ हैं जो हत्या के मकसद, पीड़ित को आखिरी बार देखे जाने और अपराध में इस्तेमाल हथियारों की बरामदगी से जुड़े थे। हथियार उस मंदिर परिसर से बरामद किए गए थे जहां सरवन पांडे रह रहा था। अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि पांडे ने ही चिकना बाबा की हत्या की थी और उसके शरीर के टुकड़े किए थे। चिकना बाबा और सरवन पांडे उर्फ महंत वीर गिरि उर्फ सीताराम बाबा चरस की खरीद-बिक्री के धंधे से जुड़े हुए थे। पैसों को लेकर हुआ विवाद ही हत्या का मकसद था।