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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला, जम्मू-कश्मीर के जमात-ए-इस्लामी संगठन पर लगाया प्रतिबंध

Thu, 28 Feb 2019 11:04 PM IST
Pranjal Dixit न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: Pranjal Dixit Updated Thu, 28 Feb 2019 11:04 PM IST
सार

  • संगठन के प्रमुख समेत कई नेताओं को किया गया था गिरफ्तार, जमात पर पहली बार हुई थी बड़ी कार्रवाई
  • महबूबा ने हुर्रियत और जमात-ए-इस्लामी के नेताओं पर छापेमारी की वैधता पर उठाया था सवाल

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Central Govt Ban Jamaat e Islami Jammu Kashmir, declares an unlawful association
डेमो

विस्तार

केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठन जमात-ए-इस्लामी पर वीरवार को प्रतिबंध लगा दिया। यह कार्रवाई संगठन के देश विरोधी और विध्वंसक गतिविधियों में जुटे होने के कारण गैरकानूनी गतिविधि निरोधक अधिनियम के तहत की गई है। 
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सुरक्षा के मुद्दे पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिए जाने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी। इस संगठन पर आतंकियों के साथ करीबी संबंध रखने का भी आरोप है। पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के 40 जवानों की शहादत के बाद सुरक्षा बलों ने अलगाववादी ताकतों के खिलाफ अभियान छेड़ रखा है। इस अभियान के तहत जमात-ए-इस्लामी के बहुत सारे नेताओं और संगठन कैडर को गिरफ्तार किया जा चुका है।
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गत शुक्रवार की रात (22 फरवरी) को पूरी घाटी में सुरक्षाबलों ने छापेमारी कर 150 से अधिक अलगाववादियों और पत्थरबाजों को हिरासत में लिया था। इनमें ज्यादातर जमात-ए-इस्लामी से जुड़े हुए थे, जिनमें संगठन के राज्य प्रमुख अब्दुल हमीद फयाज भी शामिल थे। संगठन ने दावा किया था कि शुक्रवार की रात पुलिस और अन्य एजेंसियों ने घाटी में कई स्थानों पर छापेमारी कर व्यापक गिरफ्तारी अभियान चलाया। इसमें उसके केंद्रीय और जिला स्तर के कई नेताओं को गिरफ्तार किया गया जिसमें अमीर (प्रमुख) डॉ. अब्दुल हमीद फयाज और वकील (प्रवक्ता) जाहिद अली शामिल थे। 
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जमात पर पहली बार हुई थी बड़ी कार्रवाई
बताते हैं कि जमात-ए-इस्लामी पर पहली बार बड़ी कार्रवाई हुई थी। संगठन पूर्व में आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन की राजनीतिक शाखा के तौर पर काम करता था। हालांकि, उसने हमेशा खुद को एक सामाजिक और धार्मिक संगठन बताया।


महबूबा ने छापेमारी की वैधता पर उठाए थे सवाल
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने हुर्रियत तथा जमात-ए-इस्लामी के नेताओं पर छापेमारी की वैधता पर सवाल उठाया था। कहा था कि मनमाने कदम से राज्य में मामला जटिल ही होगा। आप एक व्यक्ति को हिरासत में रख सकते हैं लेकिन उसके विचारों को नहीं। हुर्रियत (एम) प्रमुख मीरवाइज उमर फारूक ने भी कहा था कि बल प्रयोग और डराने से स्थिति केवल खराब ही होगी।
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