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Ceasefire: 'अब हमें बम-गोलियों की आवाजें न डरातीं', रात का सन्नाटा भी फायरिंग की आवाज से छलनी; नापाक हरकत जारी

Sat, 03 May 2025 03:16 PM IST
शाहरुख खान अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला, श्रीनगर Published by: शाहरुख खान Updated Sat, 03 May 2025 03:16 PM IST
सार

बॉर्डर पर पाकिस्तान की नापाक हरकत जारी है। आठ दिन में 22 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया गया है। लोगों ने बंकरों में शरण ले ली है। सुरक्षा बलों ने गश्त बढ़ा दी है। लोगों का कहना है कि हम अब गोलियों की आवाज सुनकर सोते हैं।

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Ceasefire Violation 22 Attacks in a Week LOC Villagers Statement We No Longer Fear Bullets Amid Continuous Fi
श्रीनगर के लाल चौक पर तैनात जवान - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती गांवों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा पर लगातार गोलीबारी कर रही है। हालात ये बन गए हैं कि सीमावर्ती गांवों में दिन ही नहीं, रात का सन्नाटा भी गोलियों की आवाज से छलनी हो रहा है। 
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पाकिस्तनी सेना की गोलीबारी के कारण यहां के लोग कहते हैं कि हम अब गोलियों की आवाज सुनकर डरते नहीं। पाकिस्तानी सेना ने लगातार नौवीं रात नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर भारतीय सेना की अग्रिम चौकियों को निशाना बनाकर गोलाबारी की। 
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पाकिस्तान एक सप्ताह में कुपवाड़ा, बारामुला, उड़ी और अखनूर सहित अन्य सेक्टरों में करीब 22 बार संघर्षविराम का उल्लंघन कर चुका है। सेना के प्रवक्ता ने कहा कि एक और दो मई की दरमियानी रात पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, बारामुला, पुंछ, नौशेरा और अखनूर क्षेत्रों के सामने नियंत्रण रेखा के पार चौकियों से बिना उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी की। 
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दो और तीन मई का रात में भी पाकिस्तानी सेना ने कुपवाड़ा, उरी और अखनूर क्षेत्रों के सामने नियंत्रण रेखा के पार बिना उकसावे के छोटे हथियारों से गोलीबारी की। सुरक्षाबल इसका माकूल जवाब दे रहे हैं। 

तंगधार के निवासी एजाज अहमद ने कहा, लगातार 9वें दिन भी नियंत्रण रेखा पर गोलीबारी जारी है, जिससे स्थानीय लोगों में डर बढ़ गया है। कई वर्षों की शांति के बाद अब हम बंकरों में शरण लेने पर मजबूर हो रहे हैं। इस डर से कि हम फिर से गोलीबारी में फंस सकते हैं। 

 

अमन और शांति की फिजा के बजाय हर तरफ बारूद की बू 
रात के अंधेरे में सिर्फ फायरिंग की आवाज गूंजती है और अमन और शांति की फिजा के बजाय हर तरफ बारूद की बू आती है।उन्होंने कहा कि अमन और शांति के बाद हमारे बच्चों के लिए बेहतर भविष्य की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब गोलाबारी फिर से शुरू होने से हमें चिंता है कि उनकी शिक्षा बाधित होगी और हमें फिर से भागने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अगर हालात ऐसे ही रहे तो जो पर्यटन यहां शुरू हुआ था, वह भी खत्म हो सकता है।
 
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