फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   case of death of 12 children in Ramnagar reached Human rights commission 

जम्मू-कश्मीरः रामनगर में 12 बच्चों की मौत का मामला पहुंचा मानवाधिकार आयोग 

Sun, 05 Apr 2020 02:27 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 05 Apr 2020 02:27 AM IST
विज्ञापन
case of death of 12 children in Ramnagar reached Human rights commission 
nhrc

उधमपुर जिले के रामनगर ब्लॉक में 12 बच्चों की मौत का मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पास पहुंच गया है। जम्मू के सामाजिक कार्यकर्ता और प्रॉमीनेंट सिटीजन एडवाइजरी कमेटी के पूर्व सदस्य सुकेश चंद्र खजूरिया ने इस मामले की याचिका दोनों आयोगों को भेजकर मामले की जांच कराने व प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की मांग की है। 

विज्ञापन


अमर उजाला ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद पूरी घटना की जांच के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर विशेषज्ञों की टीम का गठन किया गया था। बाद में हिमाचल प्रदेश में सिरप आपूर्ति करने वाली कंपनी को बंद भी किया गया था।  
विज्ञापन


राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भेजी गई याचिका में खजूरिया ने कहा कि रामनगर में 12 बच्चों की मौत के लिए पूरी व्यवस्था जिम्मेदार है। बच्चों को खोने वाले परिवार आर्थिक रूप से कमजोर और अनुसूचित जाति से संबंधित हैं। इस मामले में जांच को केवल दवा की सैंपल जांच तक ही सीमित कर दिया गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम और अन्य स्वास्थ्य एजेंसियों ने कोल्ड बेस्ट-पीसी सिरप दवा के सेवन से बच्चों की मौत की पुष्टि की है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर भी सदन में इसका आधिकारिक रूप से जवाब दे चुके हैं। दूसरी तरफ जम्मू-कश्मीर में अभी तक पीड़ित परिवारों की सुध नहीं ली गई है। उन्होंने कहा कि दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो के कर्मी की मौत पर दिल्ली सरकार ने मृतक अंकित शर्मा के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया है। 


वहीं, रामनगर में गरीब परिवारों के 12 मासूमों की मौत पर कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। यह दर्शाता है कि घटिया और जानलेवा दवाओं उत्पादक सरकारी अमले से गठजोड़ कर अपना गोरखधंधा चलाते हैं। रामनगर मामले में बच्चों को जीवित तो नहीं किया जा सकता है लेकिन गरीब परिवारों को न्याय जरूर दिलाया जा सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed