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सरहद पर रहने वाले लोगों का अहम हिस्सा है बंकर
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परगवाल। सरहद पर रहने वाले लोगों को पाकिस्तानी फायरिंग से बचाने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपये खर्च कर बंकर निर्माण कराया। ज्यादातर बंकर रखरखाव के अभाव में गंदगी से पटे हैं। इनमें ज्यादातर सामुदायिक बंकर हैं। इसमें फायरिंग में एक से ज्यादा परिवार के लोग शरण ले सकते हैं।
इसके विपरीत कुछ छोटे बंकर जिनका निर्माण एक परिवार की सुरक्षा के लिए हुआ है। उनमें ज्यादातर बंकर लोगों के आंगन में या बिलकुल पास बने हैं। उनको साफ सुथरा रखने का प्रयास कुछ लोगों द्वारा जरूर किया गया है। इनमें तहसील परगवाल के स्थानीय निवासी बलवान सिंह के आंगन में भी बना बंकर शामिल है। ठेकेदार तो बंकर का निर्माण कर चला गया, लेकिन बलवान सिंह ने बंकर को साफ सुथरा बनाने का प्रशंसनीय काम किया है। बलवान सिंह ने बताया कि बंकर निर्माण के बाद उन्होंने सोचा की सरहद पर रहते हुए यह बंकर हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनें रहेंगे। क्योंकि पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं कि कब वह फायरिंग शुरू कर दे। इसलिए उन्होंने बंकर को अंदर से साफ सुथरा तथा सुंदर बनाने का सोचा। उसके लिए बाकायदा उन्होंने अपने पैसे खर्च कर बंकर के अंदर टाइल लगवाकर साफ-सुथरा रखने का प्रयास किया।
दूसरी तरफ गांव जट्टे दे कोठे निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन मदन सिंह ने भी अपने आंगन में बने बंकर को साफ सुथरा रखने का प्रयास किया है। मदन सिंह ने भी पैसे खर्च कर बंकर को अंदर से साफ सुथरा बनाया है। मजेदार बात यह है कि उन्होंने बंकर का प्रवेश द्वार अपने मकान के कमरे में रखा है, जिससे फायरिंग में बंकर में जाने के लिए कोई परेशानी न हो। मदन सिंह का कहना है कि सेना में बंकर की काफी अहमियत होती है। दूसरा सरहद पर रहने वाले लोगों के लिए भी बंकर अहम हिस्सा बन गया है। क्योंकि फायरिंग में हम बंकर के अंदर रह कर अपनी जान बचाते हैं। इसलिए इसको साफ सुथरा रखना हमारा दायित्व बनता है।
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इसके विपरीत कुछ छोटे बंकर जिनका निर्माण एक परिवार की सुरक्षा के लिए हुआ है। उनमें ज्यादातर बंकर लोगों के आंगन में या बिलकुल पास बने हैं। उनको साफ सुथरा रखने का प्रयास कुछ लोगों द्वारा जरूर किया गया है। इनमें तहसील परगवाल के स्थानीय निवासी बलवान सिंह के आंगन में भी बना बंकर शामिल है। ठेकेदार तो बंकर का निर्माण कर चला गया, लेकिन बलवान सिंह ने बंकर को साफ सुथरा बनाने का प्रशंसनीय काम किया है। बलवान सिंह ने बताया कि बंकर निर्माण के बाद उन्होंने सोचा की सरहद पर रहते हुए यह बंकर हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनें रहेंगे। क्योंकि पाकिस्तान का कोई भरोसा नहीं कि कब वह फायरिंग शुरू कर दे। इसलिए उन्होंने बंकर को अंदर से साफ सुथरा तथा सुंदर बनाने का सोचा। उसके लिए बाकायदा उन्होंने अपने पैसे खर्च कर बंकर के अंदर टाइल लगवाकर साफ-सुथरा रखने का प्रयास किया।
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दूसरी तरफ गांव जट्टे दे कोठे निवासी सेवानिवृत्त कैप्टन मदन सिंह ने भी अपने आंगन में बने बंकर को साफ सुथरा रखने का प्रयास किया है। मदन सिंह ने भी पैसे खर्च कर बंकर को अंदर से साफ सुथरा बनाया है। मजेदार बात यह है कि उन्होंने बंकर का प्रवेश द्वार अपने मकान के कमरे में रखा है, जिससे फायरिंग में बंकर में जाने के लिए कोई परेशानी न हो। मदन सिंह का कहना है कि सेना में बंकर की काफी अहमियत होती है। दूसरा सरहद पर रहने वाले लोगों के लिए भी बंकर अहम हिस्सा बन गया है। क्योंकि फायरिंग में हम बंकर के अंदर रह कर अपनी जान बचाते हैं। इसलिए इसको साफ सुथरा रखना हमारा दायित्व बनता है।
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