{"_id":"69713a9ae8739181ba0212ce","slug":"budget-news-jammu-news-c-10-jmu1052-817785-2026-01-22","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: बजट से पहले सीएम के बुलावे का इंतजार कर रहे कारोबारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: बजट से पहले सीएम के बुलावे का इंतजार कर रहे कारोबारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- पिछली बार की तरह नहीं आया कोई न्योता, औद्योगिक इकाइयों को विशेष राहत देने पर जोर
जम्मू। उद्योग जगत बजट से पहले चर्चा के लिए सीएम उमर अब्दुल्ला के बुलावे का इंतजार कर रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज जम्मू का कहना है कि पिछली बार बजट से पहले कारोबारियों को बुलाकर राय ली गई थी। जबकि इस बार कोई पहल नहीं हुई है। कारोबारियों का मानना है कि मौजूदा औद्योगिक इकाइयां पहले से संकट में हैं और बजट से उन्हें राहत की उम्मीद है।
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने कहा कि कारोबारी मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर समस्याएं और मांगें रखना चाहते हैं। उनकी मांग है कि जीएसटी से पहले उद्योगों को जो इंसेंटिव मिलते थे, उनके बराबर लाभ अब नेट जीएसटी, स्टेट जीएसटी और आईजीएसटी के रिइंबर्समेंट के रूप में दिया जाए। टर्नओवर इंसेंटिव पूरा दिया जाए और वर्किंग कैपिटल पर सब्सिडी बहाल की जाए। साथ ही पावर टैरिफ को पांच साल के लिए फ्रीज किया जाए और बिजली दरों को वापस लिया जाए। औद्योगिक इकाइयों को बिजली बिल में छूट मिले। इसके अलावा बकाया राशि पर ब्याज और जुर्माना माफ किया जाए।
आटा मीलों की समस्या का हल
जैन ने प्रदेश की आटा मिलों की खराब हालत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंजाब से आने वाले गेहूं पर वहां की सरकार छह फीसदी मंडी शुल्क वसूल रही है, जिससे प्रदेश की आटा मिलें गंभीर संकट में हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार बजट में इस समस्या का भी समाधान करे। इसके साथ इंडस्ट्रियल एस्टेट में लीज होल्ड अधिकारों को फ्री होल्ड में बदलने की मांग रखी।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू। उद्योग जगत बजट से पहले चर्चा के लिए सीएम उमर अब्दुल्ला के बुलावे का इंतजार कर रहा है। फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज जम्मू का कहना है कि पिछली बार बजट से पहले कारोबारियों को बुलाकर राय ली गई थी। जबकि इस बार कोई पहल नहीं हुई है। कारोबारियों का मानना है कि मौजूदा औद्योगिक इकाइयां पहले से संकट में हैं और बजट से उन्हें राहत की उम्मीद है।
फेडरेशन ऑफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष वीरेंद्र जैन ने कहा कि कारोबारी मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर समस्याएं और मांगें रखना चाहते हैं। उनकी मांग है कि जीएसटी से पहले उद्योगों को जो इंसेंटिव मिलते थे, उनके बराबर लाभ अब नेट जीएसटी, स्टेट जीएसटी और आईजीएसटी के रिइंबर्समेंट के रूप में दिया जाए। टर्नओवर इंसेंटिव पूरा दिया जाए और वर्किंग कैपिटल पर सब्सिडी बहाल की जाए। साथ ही पावर टैरिफ को पांच साल के लिए फ्रीज किया जाए और बिजली दरों को वापस लिया जाए। औद्योगिक इकाइयों को बिजली बिल में छूट मिले। इसके अलावा बकाया राशि पर ब्याज और जुर्माना माफ किया जाए।
विज्ञापन
आटा मीलों की समस्या का हल
जैन ने प्रदेश की आटा मिलों की खराब हालत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि पंजाब से आने वाले गेहूं पर वहां की सरकार छह फीसदी मंडी शुल्क वसूल रही है, जिससे प्रदेश की आटा मिलें गंभीर संकट में हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार बजट में इस समस्या का भी समाधान करे। इसके साथ इंडस्ट्रियल एस्टेट में लीज होल्ड अधिकारों को फ्री होल्ड में बदलने की मांग रखी।
विज्ञापन