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सीमा पर शांति बहाली के बाद सरकार अब पाकिस्तान से छंब खाली कराए
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ज्यौड़ियां। शांति प्रक्रिया को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की सहमति को आगे बढ़ाते हुए अब छंब को भी पाकिस्तान से वापस लेने की मांग उठ रही है। छंब से आए लोगों का कहना है यह क्षेत्र देश का अटूट अंग है।
बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारत का उपजाऊ क्षेत्र कहे जाने वाले छंब पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया। अब बनी शांति प्रक्रिया को जमीन पर मजबूत करते हुए पाकिस्तान से छंब क्षेत्र को वापस लेने की मांग पर भारत सरकार की तरफ से बातचीत की जाए। इस विषय में गांव चकला छोड़कर खौड़ कैंप में रहे रहे डिप्टी राम ने बताया कि छंब क्षेत्र में हमारे 30 गांव थे। इनमें से पांच गांव बहुत बडे़ थे। इनमें गांव देवा, चकला, मनावर (मनोर), मतरेयाल तथा छंब शामिल रहे। अगर यह सभी भारत के पास आ जाएं तो बड़ी उपलब्धि होगी।
वहीं चरण दास जोकि छंब के गांव मतरेयाल में रहते थे, ने बताया कि छंब क्षेत्र की खेती योग्य जमीन वर्ष 1971 में छोड़कर आए थे। वह जमीन बहुत ही उपजाऊ थी। मोदी सरकार से मांग है कि इसे पाकिस्तान से ले लिया जाए। बुजुर्ग महिला धनी देवी ने बताया कि हमारा गांव चकला था। छंब के सभी तीस गांवों में 1971 से पहले लगभग पचास हजार के करीब परिवार रह रहे थे। युद्ध के बाद सभी को सुरक्षित स्थानों पर बसाया गया। शांति होने के बाद कठुआ, आरएस पुरा सहित अन्य कई क्षेत्रों में हमारे लोगों को बसा दिया गया। जहां भी हमारे लोग सीमा पर गोलाबारी का सामना कर रहे थे और अब दोनों देशों के बीच जो शांति बहाली को लेकर बातचीत हुई है। उससे हम लोग काफी खुश हैं। हमारी प्रधानमंत्री से अपील है कि अब छंब को वापस लेने के लिए पहल की जाए।
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बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारत का उपजाऊ क्षेत्र कहे जाने वाले छंब पर पाकिस्तान ने कब्जा कर लिया। अब बनी शांति प्रक्रिया को जमीन पर मजबूत करते हुए पाकिस्तान से छंब क्षेत्र को वापस लेने की मांग पर भारत सरकार की तरफ से बातचीत की जाए। इस विषय में गांव चकला छोड़कर खौड़ कैंप में रहे रहे डिप्टी राम ने बताया कि छंब क्षेत्र में हमारे 30 गांव थे। इनमें से पांच गांव बहुत बडे़ थे। इनमें गांव देवा, चकला, मनावर (मनोर), मतरेयाल तथा छंब शामिल रहे। अगर यह सभी भारत के पास आ जाएं तो बड़ी उपलब्धि होगी।
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वहीं चरण दास जोकि छंब के गांव मतरेयाल में रहते थे, ने बताया कि छंब क्षेत्र की खेती योग्य जमीन वर्ष 1971 में छोड़कर आए थे। वह जमीन बहुत ही उपजाऊ थी। मोदी सरकार से मांग है कि इसे पाकिस्तान से ले लिया जाए। बुजुर्ग महिला धनी देवी ने बताया कि हमारा गांव चकला था। छंब के सभी तीस गांवों में 1971 से पहले लगभग पचास हजार के करीब परिवार रह रहे थे। युद्ध के बाद सभी को सुरक्षित स्थानों पर बसाया गया। शांति होने के बाद कठुआ, आरएस पुरा सहित अन्य कई क्षेत्रों में हमारे लोगों को बसा दिया गया। जहां भी हमारे लोग सीमा पर गोलाबारी का सामना कर रहे थे और अब दोनों देशों के बीच जो शांति बहाली को लेकर बातचीत हुई है। उससे हम लोग काफी खुश हैं। हमारी प्रधानमंत्री से अपील है कि अब छंब को वापस लेने के लिए पहल की जाए।
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