बारूदी धमाकों के बीच खाली होने लगे सीमांत गांव
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नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी जारी है। एलओसी पर बसे गांवों में सन्नाटा पसरा है। लगातार बरस रहे गोलों के बीच आंसू और आशंकाओं से घिरे ग्रामीण गुजारे के जिए जरूरी सामान साथ लेकर अपने घर से सुरक्षित आसरे की तलाश में निकल गए हैं।
कब लौटेंगे, पता नहीं। बच्चों की पढ़ाई बंद। मवेशियों के दाना-पानी का भी कोई ठिकाना नहीं। खुद के खाने के भी लाले पड़े। पुंछ जिले में 120 किलोमीटर लंबी नियंत्रण रेखा से सटे ज्यादातर गांव वीरान होने लगे हैं।
यहां के वाशिंदे करीबी रिश्तेदारों के घरों में पनाह ले रहे हैं। उन्हें इस बात का भी मलाल है कि संकट की इस घड़ी में सरकार के हाथ मदद को नहीं बढ़े। कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
लेकिन करीब दो दर्जन गांवों में अपनी दहलीज छोड़कर दर-बदर होने वालों की तादाद हजारों में बताई जा रही है। मासूम बच्चे तो समझ ही नहीं पा रहे, कि यह सब क्या हो रहा है। स्कूल के साथ-साथ उनके खेल-कूद भी बंद हो गए हैं।
जिंदगी का कोई भरोसा ही नहीं
इन सबके बीच पाक द्वारा रह-रहकर दागे जा रहे गोले और मोर्टार। जिंदगी का कोई भरोसा ही नहीं। पाकिस्तान ने सोमवार को लगातार नौवें दिन नियंत्रण रेखा पर गोलाबारी की। सैन्य प्रवक्ता के आनुसार पुंछ के मंडी और सब्जियां सेक्टर में सुबह दस बजे पाकिस्तान ने अग्रिम चौकियों को निशाना बनाते हुए गोलाबारी शुरू की।
इस दौरान 82 एमएम और 120 एमएम के मोर्टार दागे गए। भारतीय सेना ने भी करारा जवाब दिया। एक बजे गोलाबारी थमी। शाम ढलते ही बालाकोट सेक्टर आधा दर्जन गांवों में फिर जबरदस्त गोलाबारी शुरू हो गई।
स्वतंत्रता दिवस के दिन पुंछ जिले के जिस बसूनी गांव में सरपंच समेत पांच लोग मारे गए थे, उस गांव के किसी घर में कोई भी ग्रामीण मौजूद नहीं है। सिर्फ मवेशी और परिंदे हैं। सोमवार की सुबह मवेशियों को चारा और पानी देने के लिए इक्का-दुक्का ग्रामीण आए और लौट गए।
पाकिस्तानी सेना जानबूझकर ग्रामीणों को निशाना बना रही
गांव के मुश्ताक अहमद इस बात से बड़े आहत हैं कि दो देशों के तनाव का कोप निरीह गांव वालों को भुगतना पड़ रहा है। पाकिस्तानी सेना जानबूझकर ग्रामीणों को निशाना बना रही है। स्थानीय सरपंच यूनियन के अध्यक्ष शब्बीर खान ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर गोलाबारी इससे पहले कभी नहीं हुई। उन्होंने बताया कि बसूनी ही नहीं आसपास के कई गांव भी पूरी तरह खाली हो चुके हैं।
हालात यह हैं कि लोगों ने जो पशु पाल रखे हैं उनको चारा डालने वाला भी गांव में कोई नहीं बचा है। गोलाबारी रुकते ही राजोरी जिले की मंजाकोट तहसील के गांव खोरीनाड़ और राजधानी क्षेत्रों से 25 परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां चले गए।
राजधानी के सरपंच गुलाम हैदर और स्थानीय निवासी एजाज अहमद, नजीर हुसेन, अली बहादुर, हाजी फैज आदि का कहना है कि जिला प्रशासन व सरकार की ओर से उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।