{"_id":"5917577e4f1c1bd542851534","slug":"bobby-forward-post-name-changed","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब शहीद गुरनाम के नाम से जानी जाएगी बोबिया फारवर्ड पोस्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब शहीद गुरनाम के नाम से जानी जाएगी बोबिया फारवर्ड पोस्ट
एस. खजुरिया, अमर उजाला/कठुआ
Updated Sun, 14 May 2017 06:58 PM IST
विज्ञापन
शहीद गुरनाम सिंह
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
21 अक्तूबर 2016 को भारत पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सरहद की रक्षा करते हुए शहीद हुए सीमा सुरक्षा बल के जवान गुरनाम सिंह के नाम पर बोबिया फारवर्ड पोस्ट का नाम रख दिया गया है। हीरानगर सेक्टर की बोबिया फारवर्ड पोस्ट पर अब गुरनाम पोस्ट लिखा गया है।
जम्मू के आरएस पुरा के रहने वाले शहीद गुरनाम सिंह ने इसी पोस्ट की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बीएसएफ के इस कदम की सीमावर्ती लोगों ने भी सराहना की है।
दरअसल, 19 और 20 अक्टूबर 2016 की मध्यरात्रि हीरानगर सेक्टर के बोबिया फारवर्ड पोस्ट पर गुरनाम तैनात थे। अचानक पौने बारह बजे के लगभग उनकी नजर पड़ती है कि सरहद पर कोई हलचल हो रही है। 150 मीटर कुछ धुंधले चेहरे दिखने लगे। बिना देर किए गुरनाम अपने साथियों को अलर्ट किया और फिर आतंकियों को ललकारते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। दोनों ओर से भीषण गोलाबारी हुई और आतंकी जबरन बीएसएफ की इस पोस्ट को निशाना बनाकर भारतीय सीमा में घुसना चाहते थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
जम्मू के आरएस पुरा के रहने वाले शहीद गुरनाम सिंह ने इसी पोस्ट की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी। बीएसएफ के इस कदम की सीमावर्ती लोगों ने भी सराहना की है।
विज्ञापन
दरअसल, 19 और 20 अक्टूबर 2016 की मध्यरात्रि हीरानगर सेक्टर के बोबिया फारवर्ड पोस्ट पर गुरनाम तैनात थे। अचानक पौने बारह बजे के लगभग उनकी नजर पड़ती है कि सरहद पर कोई हलचल हो रही है। 150 मीटर कुछ धुंधले चेहरे दिखने लगे। बिना देर किए गुरनाम अपने साथियों को अलर्ट किया और फिर आतंकियों को ललकारते हुए कार्रवाई शुरू कर दी। दोनों ओर से भीषण गोलाबारी हुई और आतंकी जबरन बीएसएफ की इस पोस्ट को निशाना बनाकर भारतीय सीमा में घुसना चाहते थे।
विज्ञापन
बार्डर
- फोटो : PTI
गुरनाम की दिलेरी के आगे आतंकी बेबस हो गए और पाकिस्तान की ओर भाग खड़े हुए। पाकिस्तानी रेंजर्स को पता लग चुका था कि गुरनाम ही वो मुख्य सिपाही है, जिसकी वजह से उसे मुंह की खानी पड़ी। ऐसे में सोची समझी साजिश के तहत 21 अक्टूबर को सुबह नौ बजकर पैंतीस मिनट पर रेंजर्स ने बदला लेने के इरादे से स्नाइपर रायफल्स से उस पर फायर किया। घात लगाकर किए गए इस हमले में गोली सीधे गुरनाम को लगी।
बावजूद इसके गुरनाम ने हथियार नहीं डाले, बल्कि उन पर फायरिंग करता रहा। इसके बाद गुरनाम को पोस्ट से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां गुरनाम नें शहादत पाई। जवाबी कार्रवाई में बीएसएफ भी मुंहतोड़ जवाब दिया। पांच साल पहले ही गुरनाम सिंह बीएसएफ में शामिल हुए थे और उनकी दिली ख्वाहिश बीएसएफ में जाने की थी।
बावजूद इसके गुरनाम ने हथियार नहीं डाले, बल्कि उन पर फायरिंग करता रहा। इसके बाद गुरनाम को पोस्ट से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां गुरनाम नें शहादत पाई। जवाबी कार्रवाई में बीएसएफ भी मुंहतोड़ जवाब दिया। पांच साल पहले ही गुरनाम सिंह बीएसएफ में शामिल हुए थे और उनकी दिली ख्वाहिश बीएसएफ में जाने की थी।