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जम्मू के अस्पतालों में खून की भारी कमी

Sun, 30 Aug 2015 08:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 30 Aug 2015 08:09 PM IST
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 blood shortage in jammu's hospitals

शहर के अस्पतालों में खून के लिए जद्दोजहद बढ़ती जा रही है। एसोसिएटेड अस्पतालों में मेडिकल कालेज जम्मू (जीएमसी) और एसएमजीएस अस्पताल में हर साल 38-40 हजार यूनिट खून की जरूरत है, लेकिन दोनों अस्पतालों के टेरेटरी केयर सेंटर में सालभर 28-30 हजार यूनिट खून ही उपलब्ध हो रहा है। यानी दस हजार यूनिट की लगातार कमी बनी हुई है।

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शहर के प्रमुख जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में हर साल करीब 25-26 हजार यूनिटों की जरूरत है, लेकिन 18-19 हजार यूनिट ही उपलब्ध हो रहा है। प्रतिदिन 150 यूनिट खून ब्लड बैंक में उपलब्ध रहता है, जिसमें 110-120 यूनिट तक जारी हो जाता है।
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संभाग के दस जिलों में यहीं पर कंपोनेंट लैब होने से इस ब्लड बैंक से जीएमसी, सुपर स्पेशलिटी, सरवाल, गांधीनगर और निजी नर्सिंग होम में खून जारी होता है। इसमें पैक सेल, फ्रेश फ्रोजन प्लाजा, प्लेटलेट आदि शामिल हैं।
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अस्पताल में रोजाना 40-45 प्रसव के मामले होते हैं, जिनमें 20-25 यूनिट रोजाना ऐसे मामलों के लिए जारी होता है। इसके अलावा थैलेसीमिया मरीजों को रोजाना 18-20 यूनिट खून जारी किया जाता है।

नए आदेश में ऐसे मरीजों को पहले और तीसरे रविवार को भी खून दिया जाएगा। सड़क हादसों, लिवर और हिमोफीलिया मरीजों के शरीर से अधिक खून बहने पर उन्हें पैक सेल चढ़ाए जाते हैं। प्रति एक यूनिट से पैक सेल, फ्रेश फ्रोजन प्लाजा और प्लेटलेट निकालकर तीन लोगों को दिए जा सकते हैं।

जीएमसी में भी इतने ही खून की जरूरत है, लेकिन यहां भी सैकड़ों यूनिट की कमी बनी हुई है। अस्पतालों में सबसे ज्यादा ओ, बी, ए और एबी ग्रुप की मांग रहती है।


नेगेटिव ब्लड के लिए ज्यादा मारामारी

सरकारी अस्पतालों में नेगेटिव ब्लड के लिए ज्यादा मारामारी रहती है। इसमें जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में कुछ यूनिट ही खून रिजर्व रहता है, लेकिन अधिकांश मामलों में मरीज को अपने रिश्तेदार से खून लेना पड़ता है।

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