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कश्मीर हिंसा पर विपक्षी दलों का राष्ट्रपति से मिलना सियासी नाटक: भाजपा
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sat, 20 Aug 2016 09:06 PM IST
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भाजपा
- फोटो : Demo Pic.
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रियासत के विपक्षी दलों के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से नई दिल्ली में मुलाकात करने को प्रदेश भाजपा ने सियासी नाटक बताया है।
पार्टी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया हैं कि वह पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार के कश्मीर में शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग नहीं कर रही है और केवल सुर्खियां बटोरने के हथकंडे अपना रही है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बलवीर राम रतन का कहना है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से कश्मीर के हालात पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नेशनल कांफ्रेंस नदारद रही। इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से बुलाई गई बैठक का कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
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पार्टी ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया हैं कि वह पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार के कश्मीर में शांति बहाली के प्रयासों में सहयोग नहीं कर रही है और केवल सुर्खियां बटोरने के हथकंडे अपना रही है।
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता बलवीर राम रतन का कहना है कि मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की ओर से कश्मीर के हालात पर बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में नेशनल कांफ्रेंस नदारद रही। इसी तरह केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से बुलाई गई बैठक का कांग्रेस ने बहिष्कार किया।
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'विपक्षी पार्टी कश्मीर के लोगों को कर रही गुमराह'
बैठक में मौजूद विपक्षी दल के नेता
- फोटो : PTI
भाजपा प्रवक्ता का कहना है कि विपक्षी पार्टियां कश्मीर घाटी के लोगों को गुमराह कर रही हैं। इनमें से किसी भी पार्टी ने कश्मीर के रास्ता भटके युवाओं को हिंसा का रास्ता त्यागने की अपील नहीं की है।
उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में किसी समूह या व्यक्ति से वार्ता करने का औचित्य नहीं है। इसके अलावा बिगड़े हालात या मौतों की न्यायिक जांच करवाने का भी समय नहीं है।
नेकां और कांग्रेस को पहले 1990, 2008 व 2010 में रियासत में बिगड़े हालात और मौतों की न्यायिक जांच करवाने की मांग करनी चाहिए, जिस समय इन पार्टियां का शासन था।
उनका कहना है कि वर्तमान स्थिति में किसी समूह या व्यक्ति से वार्ता करने का औचित्य नहीं है। इसके अलावा बिगड़े हालात या मौतों की न्यायिक जांच करवाने का भी समय नहीं है।
नेकां और कांग्रेस को पहले 1990, 2008 व 2010 में रियासत में बिगड़े हालात और मौतों की न्यायिक जांच करवाने की मांग करनी चाहिए, जिस समय इन पार्टियां का शासन था।