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मिशन बंगाल के लिए जम्मू-कश्मीर से संदेश देने की तैयारी में भाजपा, अपनाई आक्रामक रणनीति

Fri, 27 Nov 2020 11:58 PM IST
दुष्यंत शर्मा बृजेश कुमार सिंह, जम्मू
बृजेश कुमार सिंह, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 27 Nov 2020 11:58 PM IST
सार

  • नए जम्मू-कश्मीर में हो रहे पहले चुनाव को जीतने के लिए उतारी केंद्रीय मंत्रियों की फौज
  • चुनाव जीतकर 370 हटने व उसके बाद के बदलावों को स्वीकार करने का है संदेश
  • भाजपा के मिशन पर ब्रेक लगाने को गुपकार गठबंधन सक्रिय, घाटी समेत कई स्थानों पर कड़ी चुनौती

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BJP preparing to deliver message from Jammu and Kashmir for Mission Bengal
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बंगाल चुनाव से पहले नए जम्मू-कश्मीर में हो रहे पहले डीडीसी चुनाव को जीतकर देशभर में संदेश देने के लिए भाजपा ने आक्रामक रणनीति अपनाई है। मिशन बंगाल से पहले इस चुनाव को जीतना भाजपा के रणनीतिकार अहम मान रहे हैं, ताकि यह संदेश दिया जा सके कि अनुच्छेद 370 हटने को जम्मू-कश्मीर की जनता ने स्वीकार कर लिया है। यही वजह है कि उसने केंद्रीय मंत्रियों की फौज को उतार दिया है। राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी यहां कैंप कर रहे हैं। वहीं, गुपकार गठबंधन भाजपा के इस मिशन पर ब्रेक लगाने के लिए सक्रिय है। खासकर कश्मीर घाटी और जम्मू संभाग में उसे कई स्थानों पर कड़ी चुनौती भी मिल रही है।

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राजनीतिक पंडितों का मानना है कि भाजपा और गुपकार गठबंधन दोनों के लिए यह चुनाव अहम है। भाजपा के लिए इस मायने में कि केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 हटाया। राज्य का अस्तित्व समाप्त कर इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित किया। इस बदलाव के बाद यह पहला चुनाव है। अगले कुछ महीनों में बंगाल के चुनाव होने हैं। इससे पहले बिहार के चुनाव थे जिसमें 370 को हटाने का मुद्दा जोर-शोर से उठाया गया था, लेकिन यहां के डीडीसी चुनाव के ठीक बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव है। भाजपा पश्चिम बंगाल में जीत के लिए हर जतन कर रही है। 
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यदि जम्मू-कश्मीर के पहले चुनाव में भगवा ब्रिगेड का परचम लहराया तो उसे पश्चिम बंगाल में आसानी से भुनाया जा सकेगा। साथ ही जम्मू-कश्मीर को भी यह बताया जा सकेगा कि अवाम उसके साथ है। सभी ने इन बदलावों को स्वीकार कर लिया है और वह विकास के मूल मंत्र पर आगे बढ़ना चाहती है। इसके साथ ही रोशनी घोटाले में नेकां, पीडीपी व कांग्रेस के नेताओं के नाम सामने आने के बाद पार्टी जोर शोर से इस मुद्दे को भुनाने में जुट गई है। यह बताने कि कोशिश की जा रही है कि 370 के रहते इस प्रकार के घोटाले आम थे। इससे आम लोगों का भला होने वाला नहीं था, बल्कि प्रभावशाली लोग ही उनकी आड़ में लाभ उठाते रहे हैं।
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वहीं, गुपकार गठबंधन के लिए भी यह चुनाव प्रतिष्ठा से जुड़ा हुआ है। गठबंधन में शामिल नेकां व पीडीपी शुरू से ही अनुच्छेद 370 को हटाने और उसके बाद के बदलावों को संविधान विरोधी व जनता के हक पर डाका बताती रही है। यह चुनाव उसे अपनी बात को साबित करने का मौका बताया जा रहा है। कहा जा रहा है कि यह गठबंधन यह संदेश देने की कोशिश में है कि कश्मीर कभी भी इन बदलावों को स्वीकार नहीं करेगा। इसी वजह से गठबंधन में शामिल सभी दलों ने कश्मीर घाटी में संयुक्त प्रत्याशी उतारे हैं। हालांकि, गठबंधन का फार्मूला जम्मू संभाग में सफल नहीं हो पाया है।

कई पूर्व मंत्रियों व विधायकों को उतारा
भाजपा ने चुनाव जीतने की रणनीति के तहत कई पूर्व मंत्रियों व पूर्व विधायकों पर दांव लगाया है। इनमें कैबिनेट मंत्री रहे चौधरी शाम लाल, राज्य मंत्री शक्ति परिहार, पूर्व विधायक प्रो. गारू राम व भारत भूषण शामिल हैं। इसके साथ ही कई जिलाध्यक्षों को भी टिकट दिया गया है। हालांकि, पार्टी को कई इलाकों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष का भी सामना करना  पड़ रहा है।


नए जम्मू-कश्मीर में हो रहा पहला चुनाव कई मायनों में महत्वपूर्ण है। भाजपा और गुपकार गठबंधन दोनों को अपने को साबित करने का यह मौका है। निश्चित रूप से भाजपा पश्चिम बंगाल के चुनाव को देखते हुए इस चुनाव को बेहद आक्रामक तरीके से लड़ रही है ताकि इसका लाभ वहां उठाया जा सके। गुपकार गठबंधन अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रही है। -प्रो. बच्चा बाबू, केंद्रीय विश्वविद्यालय, जम्मू

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