भाजपा में मुस्लिम हैं, कांग्रेस में हिंदु नहीं
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यह महज एक इत्तेफाक कहा जाए या फिर किस्मत का खेल कि पहली बार ऐसा हुआ कि दो बड़े राजनीतिक दलों में हिंदु और मुस्लिम विधायकों को लेकर दिलचस्प गणित बना है।
देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस में पहली बार ऐसा हुआ कि पार्टी में कोई भी विधायक हिंदु नहीं है। जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास पहली बार कोई मुस्लिम समुदाय का चेहरा सामने आया है।
ऐसे में दोनों दलों की राजनीति में काफी कुछ सोच विचार चल रहा है। खासकर कांग्रेस सोचने पर मजबूर हो गई कि कहीं उसका दायरा कश्मीर घाटी में ही न सिमट जाए।
लेकिन भाजपा के लिए जरूर राहत की बात है कि उसके पास कम से कम एक मुस्लिम चेहरा है।
जल्द हारे हुए उम्मीदवारों से होगी बात
कांग्रेस के 12 विधायक जीत कर विधानसभा पहुंचेंगे। लेकिन यह सभी मुस्लिम समुदाय के हैं। पांच जम्मू संभाग के पुंछ, डोडा, किश्तवाड़, रामबन और रियासी जिले के हैं। जबकि 3 लद्दाख और 4 कश्मीर खित्ते से हैं।
जीते हुए सभी विधायकों में से कोई भी हिंदु विधायक नहीं है। कांग्रेस का दायरा सिर्फ घाटी और मुस्लिम क्षेत्रों में ही सिमटता हुआ नजर आ रहा है। जिस पर पार्टी को गंभीरता से विचार करना पड़ रहा है।
सूत्रों की मानें तो इसे लेकर पार्टी बड़े पैमाने पर मंथन करने में जुटी हुई है। जल्द ही इसे लेकर एक बड़ी बैठक होगी और हारे प्रत्याशियों से बात होगी।
पार्टी में पुराने नेताओं की जगह युवा नेताओं को लाने की कवायद भी चल रही है। पार्टी का मानना है कि युवाओं के जरिए जनता की नब्ज टटोलने में आसानी होगी।
भाजपा के 34 में से 32 की जमानत जब्त
वहीं भाजपा के लिए चुनाव में एक राहत जरूर है। पार्टी को एक मुस्लिम विधायक मिला है। कालाकोट से अब्दुल गनी कोहली जीत कर आए हैं और वह एक मात्र मुस्लिम विधायक होंगे, जो भाजपा की तरफ से विधानसभा में बैठैंगे।
पार्टी को पहली बार कोई मुस्लिम समुदाय का विधायक मिला है। बेशक घाटी में पार्टी का कोई प्रत्याशी न जीत पाया हो, लेकिन अब्दुल गनी की जीत के सहारे नये समिकरण बनाने के लिए भाजपा प्रयास करेगी।
बतातें चलें कि भाजपा ने 34 मुस्लिम प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। इनमें से 32 अपनी जमानत भी नहीं बचाए पाए।