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भागवत बोले: 370 की समाप्ति से व्यवस्था बदली, मानसिकता बदलना जरूरी, लंबे संघर्ष के बाद मिला है यह बदलाव
Sun, 03 Oct 2021 03:11 PM IST
करिश्मा चिब
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: करिश्मा चिब
Updated Sun, 03 Oct 2021 03:11 PM IST
सार
जम्मू में आरएसएस के सरसंघचालक बोले कि छोटे-छोटे स्वार्थों से देश बड़ा, हम देश को विश्व शक्ति नहीं, विश्व गुरू बनाना चाहते हैं। अहंकार और कट्टरपंथ के कारण विश्व के कई देशों में अस्थिरता, भारत की समृद्ध संस्कृति से विश्व को बड़ी उम्मीद। उन्होंने कहा सूरत और कोयंबटूर शहरों की तरह भारतीयों को मिलजुलकर रहना सीखना होगा।
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संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघ चालक मोहन भागवत ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 व 35ए की समाप्ति के बाद व्यवस्था बदल चुकी है। व्यवस्था परिवर्तन के लिए लंबा संघर्ष चला और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी समेत अनेक बलिदानों से 370 के निरस्तीकरण का आनंद देश में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। व्यवस्था बदलने की खुशी है, लेकिन यह देखना जरूरी है कि मानसिकता बदली है या नहीं। अनुच्छेद 370 की समाप्ति के बाद मानसिकता बदलने की जरूरत है।
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भागवत जम्मू के जनरल जोरावर सिंह सभागार में शनिवार को प्रबुद्ध जनों की विचार गोष्ठी को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश के सभी लोग एक हैं। हमारा देश एक संस्कृति से बंधा है। भारत माता के अन्न जल से ही हमारा स्वभाव बना है। हमारे पूर्वज हमारा गौरव हैं। कई पीढ़ियां लगीं तब जाकर इस संस्कृति की रक्षा हुई है। छोटे-छोटे स्वार्थों से देश बड़ा है। हम विश्व शक्ति नहीं बल्कि विश्व गुरु बनना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति सनातन काल से चलती आई है।
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संपूर्ण विश्व के लिए आत्मीयता बनाए रखने वाला विचार भारत का ही है। अहंकार और कट्टरपंथ के कारण ही विश्व के कई देशों में लोग दुखी हैं। हमारा उद्देश्य सहभागी बनना है। संघ प्रमुख ने कहा कि पश्चिमी देशों में ब्रिटेन जिसे यूनाइटेड किंगडम भी कहते हैं, वह तब तक ही एकजुट है जब तक अंग्रेजी भाषा है। अरब देश की एकजुटता का कारण धर्म है। धर्म नहीं तो यह देश टूट जाएंगे। लेकिन भारत एक राष्ट्र है, लेकिन भाषा, नस्ल और व्यावसायिक हितों जैसे सीमित मापदंडो के कारण नहीं हैं।
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सदियों से अपनी संस्कृति के बल पर एकजुट बना हुआ है। हमने सब दिशाओं में विकास करने के बाद भी पर्यावरण को सुरक्षित व संरक्षित रखा। यह हमारी संस्कृति है। उन्होंने कहा कि वह पिछले दिनों सूरत शहर में गए थे। देश के हर क्षेत्र के लोग वहां खुशी-खुशी रह रहे हैं। कोयंबटूर शहर में भी लोग खुशी-खुशी रह रहे हैं। यही भाव देश के हर क्षेत्र और हर नागरिक को अपने भीतर लाना है।
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हम अतिवादी बनते जा रहे, संसद भी नहीं चलने दी जा रही
संघ प्रमुख ने कहा कि प्रजातंत्र में व्यवस्था बनेगी और बदलेगी। जो फैसला हो गया वह चलना चाहिए। अपनों के साथ अपने विषयों की चर्चा कर फैसले होने चाहिए। लेकिन वर्तमान में व्यवस्थाओं में हम बहुत ज्यादा अतिवादी बनते जा रहे हैं। संसद चलने नहीं दी जाती। जन समस्याओं के समाधान में व्यवधान आता है। मर्यादा होनी चाहिए कि हम सबसे बड़ा देश हैं।
अगर इस भाव से देश में काम होगा तो कोई खतरा भारत को छू तक नहीं सकेगा। उन्होंने कहा कि देश को बड़ा बनाते-बनाते 39 साल की आयु में स्वामी विवेकानंद की मृत्यु हो गई। सरदार भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव शहीद हुए। आओ हम सब भी छोटे-छोटे स्वार्थों को छोड़ राष्ट्र को बड़ा बनाएं।