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चिकित्सकों के इस जज्बे को सलाम, आप भी करेंगे नाज

Thu, 25 Sep 2014 10:26 AM IST
Updated Thu, 25 Sep 2014 10:26 AM IST
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berth operation in Candlelight in valley

कश्मीर में आई बाढ़ के दौरान डॉक्टरों का एक मानवतावादी रवैया सामने आया जब संसाधनों के अभाव में लाचार हुए डॉक्टरों ने मोमबत्ती की रोशनी में ही छह महिलाओं का प्रजनन आपरेशन किया।

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घाटी में बाढ़ के दौरान कम से कम आधा दर्जनों बच्चों ने मोमबत्ती की रोशनी में ही इस दुनिया में आंखे खोली। इस दौरान डॉक्टरों ने संसाधनों की कमी को किसी भी तरह अपने काम पर हावी नहीं होने दिया और सभी बच्चों को जन्म दिलवाकर उन्हें सुरक्षित बचाए रखा।
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डाक्टरों की मेहनत रंग लाई और जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह स्वस्थ रहे। घाटी से बाढ़ का पानी छटने के बाद दोबार पटरी पर आई चिकित्सा सुविधा के दौरान डॉक्टरों ने बाढ़ के दौरान के अपने अनुभव बयां किए

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बाढ़ में गुम हुई बिजली, जनरेटर भी हुआ ठप

berth operation in Candlelight in valley

श्रीनगर के लाल डेड अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक मुस्ताक अहमद राथर बताते हैं कि बाढ़ के दौरान छह सितंबर को अस्पताल की निचली मंजिल पूरी तरह झेलम के पानी में डूब चुकी थी। इसी दौरान अस्पताल में छह महिलाओं को लाया गया जिनका प्रजनन किया जाना था।

उनके आपरेशन की तैयारी की जा रही थी, इसी बीच बाढ़ के कारण अस्पताल की पावर सप्लाई ठप हो गई। अगले दिन सुबह पानी भरने के कारण अस्पताल के जनरेटर ने भी काम करना बंद कर दिया।

इसके बाद मोमबत्ती की रोशनी में ही सभी महिलाओं का प्रजनन करवाने का निर्णय लिया गया। राथर के अनुसार गायनकलॉजी डिपार्टमेंट की हेड डॉक्टर शहनाज तेंग के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई।

छह बच्चों ने खोली मोमबत्ती की रोशनी में आंखे

berth operation in Candlelight in valley

जिसने चार महिलाओं को सामान्य प्रजनन करवाया। जबकि दो महिलाओं का आपरेशन कर बच्चों को जन्म दिलवाया गया। डॉक्टर के अनुसार मोमबत्ती की रोशनी में सीमित संसाधनों के बीच यह कार्य अत्यंत जोखिम भरा था लेकिन डॉक्टरों की मेहनत ओर समर्पण रंग लाया और सभी बच्चों को सकुशल जन्म हुआ।

डॉक्टर राथर बताते हैं कि किस तरह बाढ़ का पानी भरने के चलते अस्पताल की ऑक्सीजन सप्लाई व्यवस्‍था ठप हो चुकी थी, जिसके बाद इमरजेंसी के लिए पार्टेबल आक्सीजन सिलेंडरों का इंतजाम किया गया।

राथर के अनुसार सबसे अच्छी बात यह रही कि बाढ़ का पानी भरने से लेकर अस्पताल से सभी मरीजों को शिफ्ट करने के दौरान अस्पताल में कोई मौत्‍ा नहीं हुई। डॉक्टरों ने यह सब उन हालातों में किया जब वो पूरी तरह से बाकी दुनिया से कटे हुए थे।

परिजनों के हालात से अनजान रहे डॉक्टर और स्टाफ

berth operation in Candlelight in valley

इससे भी ज्यादा बड़ी बात ये रही कि अस्पताल में उस दौरान अपनी ड्यूटी निभा रहे डॉक्टरों और स्टाफ को अपने परिजनों की कोई खोज खबर नहीं थी। किसी को नहीं पता था कि उनके परिजन किन हालात में हैं।

इसके बावजूद भी किसी डॉक्टर ने अपने फर्ज में किसी तरह की कोताही नहीं बरती। वे इन हालातों से अच्छी तरह निपटने के लिए अस्पताल के चिकित्सकों और उनके परिजनों के सराहनीय योगदान के लिए धन्यवाद देते हैं।

वहीं अस्पताल के स्टाफ की मुसीबतें इसी से कम नहीं हुईं। डॉक्टर राथर निराशा से बताते हैं कि मरीजों को शिफ्ट करने के बाद हम लोग भी अस्पताल छोड़ना चाहते थे लेकिन किसी ने हमारी मदद नहीं की।

किसी ने नहीं ली सुध, खिचड़ी खाकर चलाया काम

berth operation in Candlelight in valley

हां, कुछ स्‍थानीय युवक जरूर हमारे पास आए और हमसे मदद के लिए पूछा। हमने उनसे सिर्फ इतना ही कहा कि हमें कुछ खाने का सामान जैसे बिस्कुट और पानी आदि ला दिया जाए। खासकर मोमबत्ती की हमें बहुत जरूरत है।

वो बताते हैं कि अस्पताल के स्टाफ ने इस दौरान सबके लिए खिचड़ी बनाने का इंतजाम किया गया जिसे कुछ मरीजों और बाकी स्टाफ ने कई दिनों तक खाया।

बता दें कि बाढ़ के पन्द्रह दिनो के दौरान घाटी में कुल 3500 के करीब बच्चों ने जन्म लिया। जिनमें से अधिकांश आर्मी के अस्पताल और प्राइवेट चिकित्सकों के यहां ही पैदा हु

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