जम्मू-कश्मीर में अब भीख मांगना अपराध नहीं, न्यायालय ने कहा- जरूरत पूरी करना अपराध कैसे हो सकता है
जम्मू-कश्मीर में भीख मांगना अब अपराध नहीं रहा। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने भीख मांगने संबंधी प्रिवेंशन ऑफ बेगरी एक्ट 1960 और रूल्स 1964 को असंवैधानिक करार देते हुए इसे खत्म कर दिया है।
हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस राजेश बिंदल की खंडपीठ ने शुक्रवार को इस मामले पर सुनवाई के दौरान यह बड़ा आदेश दिया। इसके साथ ही 23 मई 2018 को श्रीनगर में उपायुक्त द्वारा भीख मांगने पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को भी हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया।
कोर्ट ने महसूस किया कि गरीबी एक मानवाधिकार का मामला है। गरीबों को जीने का अधिकार है। भारतीय संविधान में नागरिकों को स्वतंत्रता, भोजन, स्वस्थ रहने, पहनने, रहने, शिक्षा और रोजमर्रा की अन्य सुविधाएं उनका मौलिक अधिकार है। जब यह सब नहीं मिलता तो गरीब भीख मांगने पर मजबूर होता है।
जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष भिखारी बना देता है- न्यायालय
न्यायालय ने कहा कि जरूरी सुविधाओं के लिए संघर्ष उन्हें भिखारी बना देता है। यह सरकार की नाकामी है कि गरीब को यह सब उपलब्ध नहीं करा पाते। इसलिए वह भीख मांगने पर मजबूर होता है। जीने के लिए इस तरह का संघर्ष अपराध तो नहीं हो सकता। गरीब आर्थिक रूप से पिछड़े हैं।
जम्मू कश्मीर प्रिवेंशन आफ बेगरी एक्ट 1960 और इसके 1964 के तहत नियम पूरी तरह से अकारण, गलत और मनमाने हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) और डी के तहत आजादी पर हमला है।
जम्मू शहर में पांच हजार भिखारी
-जम्मू शहर में पांच हजार भिखारी
बता दें कि जम्मू कश्मीर में भीख मांगने वालों की संख्या काफी हो चुकी है। कई बार बड़े स्तर पर भी इसे लेकर मामला उठा है। जम्मू शहर में ही पांच हजार के करीब भीख मांगने वाले हैं।