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टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने से पहले रास्ता किया था साफ
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Before the martyrdom, Tiger Hill had clean
- फोटो : RSPURA
ज्यौड़ियां। कारगिल युद्ध को 20 वर्ष पूरे हो गए, लेकिन इससे जुड़ी कुछ यादें ऐसी हैं कि मानो घटना कल की ही बात हो। खौड़ के गांव चक्क मलाल निवासी बहादुर सिपाही अनिल मन्हास से जुड़ी यादें भी कुछ ऐसी ही हैं। उनकी याद आज भी परिवार ही नहीं पूरे इलाके के लोगों के जेहन में ताजा है। उन्होंने शहादत पाने से पहले टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने का रास्ता साफ किया था।
खौड़ उपजिले के गांव चक्क मलाल निवासी सिपाही अनिल मन्हास 14 जैक राइफल रेजिमेंट में सिपाही के पद पर तैनात थे। नौ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए उन्होंने शहादत का जाम पिया था।
अनिल कुमार के छोटे भाई सुनील मन्हास ने बताया कि हम दोनों भाई एक ही यूनिट में तैनात थे। टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने की इच्छा को लेकर दो भाई एक साथ जंग में गए थे। लेकिन अनिल मिशन पूरा होने से महज एक कदम पहले दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गए, लेकिन इससे पहले उसने ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने के लिए रास्ता साफ कर दिया था। लेकिन सुनील डटे रहे।
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स्थानीय लोगों ने वीर सपूत को याद करते हुए कहा कि युद्ध में शहीद हुए कई जवान युद्ध से पहले जब घर से छुट्टी काट अपनी यूनिट में ड्यूटी लौटे होंगे तो परिवार वालों से फिर जल्दी घर वापस आने तो नया मकान बनाने और बहन की शादी करने का वायदा कर आए होंगे। लेकिन कई जवान मातृभूमि की रक्षा करते खुद के प्राण को न्यौछावर कर गये और पीछे छोड़ गए कभी न खत्म होने वाली प्रतीक्षा।
इस बार शहीदी दिवस पर नहीं हुआ हवन पूजन
शहीद सिपाही अनिल के परिवार की तरफ से हर साल शहीदी दिवस मनाया जाता रहा, लेकिन इस बार नहीं मनाया गया। क्योंकि शहीद के पिता रतन सिंह मन्हास का करीब छह माह पहले देहांत हो गया था। इसके मद्देनजर इस बार शहीदी दिवस नहीं मनाया गया। परिवार वालों की तरफ से सिर्फ श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन हवन-यज्ञ तथा भंडारे का आयोजन नहीं किया गया।
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खौड़ उपजिले के गांव चक्क मलाल निवासी सिपाही अनिल मन्हास 14 जैक राइफल रेजिमेंट में सिपाही के पद पर तैनात थे। नौ जुलाई 1999 को टाइगर हिल पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए उन्होंने शहादत का जाम पिया था।
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अनिल कुमार के छोटे भाई सुनील मन्हास ने बताया कि हम दोनों भाई एक ही यूनिट में तैनात थे। टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने की इच्छा को लेकर दो भाई एक साथ जंग में गए थे। लेकिन अनिल मिशन पूरा होने से महज एक कदम पहले दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हो गए, लेकिन इससे पहले उसने ने टाइगर हिल पर तिरंगा फहराने के लिए रास्ता साफ कर दिया था। लेकिन सुनील डटे रहे।
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स्थानीय लोगों ने वीर सपूत को याद करते हुए कहा कि युद्ध में शहीद हुए कई जवान युद्ध से पहले जब घर से छुट्टी काट अपनी यूनिट में ड्यूटी लौटे होंगे तो परिवार वालों से फिर जल्दी घर वापस आने तो नया मकान बनाने और बहन की शादी करने का वायदा कर आए होंगे। लेकिन कई जवान मातृभूमि की रक्षा करते खुद के प्राण को न्यौछावर कर गये और पीछे छोड़ गए कभी न खत्म होने वाली प्रतीक्षा।
इस बार शहीदी दिवस पर नहीं हुआ हवन पूजन
शहीद सिपाही अनिल के परिवार की तरफ से हर साल शहीदी दिवस मनाया जाता रहा, लेकिन इस बार नहीं मनाया गया। क्योंकि शहीद के पिता रतन सिंह मन्हास का करीब छह माह पहले देहांत हो गया था। इसके मद्देनजर इस बार शहीदी दिवस नहीं मनाया गया। परिवार वालों की तरफ से सिर्फ श्रद्धांजलि दी गई, लेकिन हवन-यज्ञ तथा भंडारे का आयोजन नहीं किया गया।