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विवाह से पहले जन्म-पत्री के बजाय आनुवंशिक-पत्री मिलाएं: डिगरा
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जम्मू विश्वविद्यालय में मनाया दुर्लभ रोग दिवस, दुर्लभ आनुवंशिक विकार पर किया जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स जम्मू विश्वविद्यालय ने विज्ञान क्लब के साथ मिलकर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और दुर्लभ रोग दिवस पर दुर्लभ आनुवंशिक विकार विषय पर जागरूक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ संजीव डिगरा मुख्य अतिथि थे।
डिगरा ने निदान तकनीकों, चुनौतियों और दुर्लभ आनुवंशिक रोगों का शीघ्र पता लगाने के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विवाह से पहले जन्म-पत्री के बजाय आनुवंशिक-पत्री के मिलान पर जोर दिया। उन मामलों की सफलता की कहानियां साझा कीं, जो आनुवंशिक परामर्श से गुजर चुके हैं। कार्यक्रम में दुर्लभ रोग संगठन के वैज्ञानिक सलाहकार डाॅ. सुधिंदर राव ने भारत में दुर्लभ बीमारियों के बारे में व्याख्यान दिया, जिसमें उनकी व्यापकता, प्रकार, कारण और व्यक्तियों और परिवारों पर प्रभाव को शामिल किया गया। उन्होंने ओआरडीआई द्वारा विभिन्न पहलों को साझा किया। वहीं एक इंटरेक्शन सत्र भी आयोजित किया गया। इसने प्रतिभागियों को जागरूक किया कि कैसे दुर्लभ बीमारी के रोगी और उनकी देखभाल करने वालों या परिवार के सदस्यों को इन रोगियों की मदद करने के लिए सरकारी पहल, आनुवंशिक परामर्शदाता, निदान, उपचार के बारे में जानकारी देकर मदद की जा सकती है।
जम्मू विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डाॅ. राकेश कुमार पंजालिया ने सरलीकृत वास्तविक जीवन के उदाहरणों के साथ आनुवांशिक बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दुर्लभ आनुवंशिक विकार मामले के अध्ययन के बारे में भी बताया। मानव आनुवांशिकी संस्थान के उप समन्वयक डाॅ. परविंदर कुमार और विज्ञान क्लब की समन्वयक डाॅ. चिन्मयी महाराणा ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की कार्यवाही का संचालन किया। आईएचजी, प्राणीशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और जम्मू विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के अनुसंधान विद्वानों और छात्रों ने भी इसमें हिस्सा लिया। साइंस क्लब द्वारा अपने जीन को जानें विषय पर आयोजित मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार वितरित किए गए।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन जेनेटिक्स जम्मू विश्वविद्यालय ने विज्ञान क्लब के साथ मिलकर राष्ट्रीय विज्ञान दिवस और दुर्लभ रोग दिवस पर दुर्लभ आनुवंशिक विकार विषय पर जागरूक कार्यक्रम आयोजित किया। इस मौके पर एसएमजीएस अस्पताल के बाल रोग विभाग के एचओडी डॉ संजीव डिगरा मुख्य अतिथि थे।
डिगरा ने निदान तकनीकों, चुनौतियों और दुर्लभ आनुवंशिक रोगों का शीघ्र पता लगाने के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने विवाह से पहले जन्म-पत्री के बजाय आनुवंशिक-पत्री के मिलान पर जोर दिया। उन मामलों की सफलता की कहानियां साझा कीं, जो आनुवंशिक परामर्श से गुजर चुके हैं। कार्यक्रम में दुर्लभ रोग संगठन के वैज्ञानिक सलाहकार डाॅ. सुधिंदर राव ने भारत में दुर्लभ बीमारियों के बारे में व्याख्यान दिया, जिसमें उनकी व्यापकता, प्रकार, कारण और व्यक्तियों और परिवारों पर प्रभाव को शामिल किया गया। उन्होंने ओआरडीआई द्वारा विभिन्न पहलों को साझा किया। वहीं एक इंटरेक्शन सत्र भी आयोजित किया गया। इसने प्रतिभागियों को जागरूक किया कि कैसे दुर्लभ बीमारी के रोगी और उनकी देखभाल करने वालों या परिवार के सदस्यों को इन रोगियों की मदद करने के लिए सरकारी पहल, आनुवंशिक परामर्शदाता, निदान, उपचार के बारे में जानकारी देकर मदद की जा सकती है।
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जम्मू विश्वविद्यालय के भू विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर डाॅ. राकेश कुमार पंजालिया ने सरलीकृत वास्तविक जीवन के उदाहरणों के साथ आनुवांशिक बीमारियों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने दुर्लभ आनुवंशिक विकार मामले के अध्ययन के बारे में भी बताया। मानव आनुवांशिकी संस्थान के उप समन्वयक डाॅ. परविंदर कुमार और विज्ञान क्लब की समन्वयक डाॅ. चिन्मयी महाराणा ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम की कार्यवाही का संचालन किया। आईएचजी, प्राणीशास्त्र, मनोविज्ञान, समाजशास्त्र और जम्मू विश्वविद्यालय के अन्य विभागों के अनुसंधान विद्वानों और छात्रों ने भी इसमें हिस्सा लिया। साइंस क्लब द्वारा अपने जीन को जानें विषय पर आयोजित मॉडल मेकिंग प्रतियोगिता के लिए पुरस्कार वितरित किए गए।
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