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Jammu News: मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन घटाने से रोष

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Bari Brahmna Industried Association Held Meeting
-उद्यमियों का आरोप, वित्त और उद्योग विभाग नहीं दे रहा प्राथमिकता, उपराज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू कश्मीर की मौजूदा औद्योगिक इकाइयों को वित्तीय प्रोत्साहन में कटौती पर उद्यमियों ने रोष जताया है। उनका आरोप है कि वर्ष 2021 के बाद राजकोषीय प्रोत्साहन को लगभग कम कर दिया गया है जिससे खासतौर पर कमजोर औद्योगिक इकाइयों को गति नहीं मिल पाई है। वित्तीय प्रोत्साहन न मिलने से मौजूदा औद्योगिक इकाइयों का विस्तार नहीं हो पाया है। उन्होंने मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के वित्तीय प्रोत्साहन और अन्य मुद्दों पर उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से हस्तक्षेप की मांग की है।

यहां वीरवार को बाड़ी ब्राह्मणा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (बीबीआईए) की एक बैठक की अध्यक्षता करते हुए अध्यक्ष ललित महाजन ने कहा कि मौजूदा औद्योगिक इकाइयों के कई ज्वलंत मुद्दे उद्योग और वित्त विभाग के पास लंबे समय से लंबित हैं। कहा, 31 मार्च 2021 तक मौजूदा चालू औद्योगिक इकाइयों के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन जीएसटी व्यवस्था के बाद उपलब्ध विवरण के अनुसार 50 प्रतिशत तक कम कर दिया गया है। राज्य सरकार द्वारा आठ जुलाई 2017 से पहले औद्योगिक इकाइयों को राजकोषीय प्रोत्साहन के रूप में 1000 करोड़ रुपये उपलब्ध करवाए गए थे। इसमें वैट छूट के रूप में 600 करोड़, अंतरराज्यीय बिक्री पर टर्नओवर प्रोत्साहन के रूप में 200 करोड़ रुपये, टोल टैक्स छूट के रूप में 200 करोड़ रुपये दिए गए, लेकिन 2021 में राजकोषीय प्रोत्साहन को लगभग 500 करोड़ रुपये तक कर दिया है। इसमें जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 450 करोड़ रुपये और टर्नओवर प्रोत्साहन के रूप में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया। इससे औद्योगिक इकाइयों के विकास को बड़ा झटका लगा है। ये इकाइयां स्थानीय नुकसान के कारण बाहरी आपूर्तिकर्ताओं के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम नहीं हैं। जनवरी 2020 से टोल टैक्स हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में कच्चे माल की अनुपलब्धता के कारण उत्पादन की लागत बढ़ गई। राजकोषीय प्रोत्साहन की प्रतिपूर्ति के लिए धन जारी करने में वित्त और उद्योग विभाग की कम प्राथमिकता रही है। जीएसटी प्रतिपूर्ति के लिए 36.20 करोड़ रुपये और स्वीकृत बजट के मुकाबले टर्नओवर प्रोत्साहन का 50 करोड़ के दावे किए गए लेकिन ट्रेजरी से बिना भुगतान के कारण आवंटित बजट राशि समाप्त हो गई है। हमारी मांग है कि 2024-25 के बजट में उक्त दावों को शामिल किया जाए। 2018 के एसआरओ 63 के तहत वित्त विभाग द्वारा नकारात्मक सूची पर भी ध्यान दिया जाए। बैठक में एसोसिएशन के पदाधिकारियों में तरुण सिंगला, अजय लंगर, विराज मल्होत्रा, राजेश जैन, विवेक सिंघल मौजूद रहे।
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