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भक्तों की भीड़ और बढ़ते पारे से पिघले बाबा बर्फानी, एनजीटी के आदेश की उड़ी धज्जियां

Wed, 25 Jul 2018 04:50 AM IST
अमित वर्मा, अमर उजाला, जम्मू
अमित वर्मा, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 25 Jul 2018 04:50 AM IST
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Baba Barfani melt with crowd of devotees and growing mercury
Amarnath yatra

हिमालय पर्वत समूह के मध्य समुद्र तल से तेरह हजार फीट की ऊंचाई पर पवित्र गुफा में स्थापित बाबा बर्फानी यात्रा के 25 दिन में ही अंतर्धान हो गए। समय से पूर्व हिमलिंग के

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पिघलने के पीछे ह्यूमन इंफा रेडिएशन (मानव शरीर से निकलने वाली गरमाहट) और तपिश को मुख्य कारण बताया गया है। जाड़े में कम बर्फबारी और घाटी में जून-जुलाई में चढ़े पारे ने पहाड़ों में गर्मी बढ़ाई।  मौसम विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई में कश्मीर के कई हिस्सों में दिन का तापमान 30 डिग्री के ऊपर रहा, इस कारण पवित्र गुफा के आसपास अधिकतम तापमान 10-20 डिग्री बना रहा। जबकि हिमलिंग को अधिक देर तक बने रहने के लिए माइनस चार या माइनस पांच तक का तापमान होना चाहिए था। 
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मौसम विशेषज्ञ यशपाल शर्मा के अनुसार जून-जुलाई में श्रीनगर, पहलगाम सहित घाटी के अन्य कई इलाकों में दिन का तापमान 33 डिग्री तक चढ़ा। अमरनाथ यात्रा के शुरू होने पर पवित्र गुफा क्षेत्र में अधिकतम तापमान 11 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच था और कई बार न्यूनतम तापमान दो से पांच के बीच रहा। लेकिन शून्य से नीचे पारा ज्यादा नहीं रहा, जिससे इस क्षेत्र में पानी जमने की स्थिति पैदा नहीं हुई। पवित्र गुफा के आसपास निरंतर तेज बारिश भी नहीं हुई। 
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आम यात्रियों के अलावा व्यवस्था से जुड़े अन्य लोगों की आवाजाही से ह्यूमन रेडिशन बढ़ जाता है। मौसम विभाग श्रीनगर के निदेशक सोनम लोटस ने बताया कि पवित्र गुफा के
आसपास के क्षेत्र में हजारों लोगों की आवाजाही से ह्यूमन रेडिशन से पारे में हुई बढ़ोतरी हुई और यह हिमलिंग के तेजी से पिघलने का कारण बना।  यात्रा के शुरू में रोजाना 15000 या इससे अधिक यात्रियों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा। 
 

पहले भी समय से पूर्व अंतर्धान होते रहे बाबा बर्फानी

Baba Barfani melt with crowd of devotees and growing mercury
amarnath
बाबा बर्फानी पहले भी स्य से पूर्व अंतर्धान होते रहे हैं। सन् 2005, 2006,  2009, 2011, 2013 में भी समय से पहले ही पवित्र अमरनाथ गुफा में हिमलिंग अंतर्धान हो चुके हैं।
हिमलिंग के बनने और अंतर्धान होने की सारी प्रक्रिया प्राकृतिक तौर पर होती रही है। ग्लोबल वार्मिंग भी हिमलिंग पर असर डालती है। 

 

हिमलिंग के बने रहने के लिए यह था जरूरी

Baba Barfani melt with crowd of devotees and growing mercury
अमरनाथ, बाबा बर्फानी
1. पवित्र गुफा के आसपास माइनस से माइनस 5 डिग्री तक का तापमान
2. हजारों लोगों की आवाजाही पर प्रदूषण को नियंत्रण करना 
3. कश्मीर के निचले इलाकों में तापमान का न बढ़ना

 

एनजीटी के आदेश की उड़ी धज्जियां

Baba Barfani melt with crowd of devotees and growing mercury
ngt - फोटो : ngt
राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिसंबर 2017 को आदेश दिए थे कि पवित्र अमरनाथ गुफा पर प्राकृतिक व्यवस्था को बनाई रखी जाए। यानी गुफा के अंदर भजन और मंत्रोच्चार पर रोक लगा कर पूरे इलाके को शांति क्षेत्र घोषित किया जाए। इस पर विवाद खड़ा होने पर जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सफाई दी कि आदेश में सिर्फ यह कहा गया है कि कोई भी श्रद्धालु या दर्शनार्थी महाशिवलिंग के सामने जब पहुंचे तो वह वहां शांति बनाए रखे। वहां प्राकृतिक अवस्था और पवित्रता को ध्वनि, गरमाहट, तरंगों और अन्य चीज से कोई नुकसान न पहुंचे। लेकिन इसका पालन नहीं हुआ। गुफा के करीब पहुंच कर भोले भंडारी के खूब नारे लगे। रात दिन भजन कीर्तन चलते रहे।
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