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Jammu News: जागरूकता से भी कैंसर का इलाज, जीवनशैली में करें बदलाव
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एमएएम कॉलेज में शिविर, स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की डॉ. नाहिदा ने बताए बचाव के तरीके
जम्मू। कैंसर लाइलाज नहीं, पर जरूरी है कि हम जागरूक रहें और बीमारी को होने न दें। जीवनशैली में बदलाव लाकर और सतर्क रह कर बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं। यह जानकारी एमएएम कॉलेज में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में छात्राओं और शिक्षकों को दी गई।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की डाॅ. नाहिदा ने कैंसर के बढ़ते खतरों, उपलब्ध इलाज, टीकाकरण की जरूरत के बारे में बताया। एक छात्रा ने सवाल किया कि क्या फंगल इंफेक्शन भी त्वचा के कैंसर का कारण है। डॉ. नाहिदा ने कहा कि हमेशा नहीं। पर कोई भी दिक्कत यदि लंबे समय तक बनी है तो जांच जरूरी हो जाती है।
एक शिक्षिका ने पूछा कि क्या हर गांठ कैंसर होती है, जिसका जवाब नहीं था। शंका दूर करते हुए डॉ. नाहिदा ने कहा कि कुछ शारीरिक बनावट पर निर्भर करता है लेकिन गांठ को लेकर डॉक्टरी सलाह के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्विक्स कैंसर का टीका नौ से 16 साल तक की उम्र की बच्चियों के लिए फ्री है। कार्यक्रम में डाॅ. आर वैष्णवी, प्रिंसिपल प्रो. अर्चना कौल, डाॅ. सीमा सूदन, प्रो. शिवाली गुप्ता, डाॅ. ज्योति रानी, डाॅ. वर्षा कपूर और डाॅ. आतिया नूर उपस्थित रहे।
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ये लक्षण महसूस हो तो करवाएं जांच
- स्तन में गांठ या बदलाव - असामान्य योनि रक्तस्राव (जैसे मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद)
- पेट में लगातार सूजन, दर्द या भारीपन (ओवेरियन कैंसर) - पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे कब्ज या पेट फूलना
- अचानक वजन कम होना या भूख न लगना - लगातार थकान या कमजोरी
- पेशाब या मल त्यागने की आदतों में बदलाव (कोलोरेक्टल कैंसर)
- स्तन, सर्वाइकल और कोलोरेक्टल कैंसर के लिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है। यदि कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू उपचार से बचें। संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि से जोखिम कम रहता है।
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जम्मू। कैंसर लाइलाज नहीं, पर जरूरी है कि हम जागरूक रहें और बीमारी को होने न दें। जीवनशैली में बदलाव लाकर और सतर्क रह कर बीमारी के खतरे को कम कर सकते हैं। यह जानकारी एमएएम कॉलेज में अमर उजाला के अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स कार्यक्रम में छात्राओं और शिक्षकों को दी गई।
स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट की डाॅ. नाहिदा ने कैंसर के बढ़ते खतरों, उपलब्ध इलाज, टीकाकरण की जरूरत के बारे में बताया। एक छात्रा ने सवाल किया कि क्या फंगल इंफेक्शन भी त्वचा के कैंसर का कारण है। डॉ. नाहिदा ने कहा कि हमेशा नहीं। पर कोई भी दिक्कत यदि लंबे समय तक बनी है तो जांच जरूरी हो जाती है।
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एक शिक्षिका ने पूछा कि क्या हर गांठ कैंसर होती है, जिसका जवाब नहीं था। शंका दूर करते हुए डॉ. नाहिदा ने कहा कि कुछ शारीरिक बनावट पर निर्भर करता है लेकिन गांठ को लेकर डॉक्टरी सलाह के बाद ही किसी निर्णय पर पहुंचना चाहिए। उन्होंने बताया कि सर्विक्स कैंसर का टीका नौ से 16 साल तक की उम्र की बच्चियों के लिए फ्री है। कार्यक्रम में डाॅ. आर वैष्णवी, प्रिंसिपल प्रो. अर्चना कौल, डाॅ. सीमा सूदन, प्रो. शिवाली गुप्ता, डाॅ. ज्योति रानी, डाॅ. वर्षा कपूर और डाॅ. आतिया नूर उपस्थित रहे।
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ये लक्षण महसूस हो तो करवाएं जांच
- स्तन में गांठ या बदलाव - असामान्य योनि रक्तस्राव (जैसे मासिक धर्म के बीच या रजोनिवृत्ति के बाद)
- पेट में लगातार सूजन, दर्द या भारीपन (ओवेरियन कैंसर) - पाचन संबंधी समस्याएं, जैसे कब्ज या पेट फूलना
- अचानक वजन कम होना या भूख न लगना - लगातार थकान या कमजोरी
- पेशाब या मल त्यागने की आदतों में बदलाव (कोलोरेक्टल कैंसर)
- स्तन, सर्वाइकल और कोलोरेक्टल कैंसर के लिए नियमित जांच महत्वपूर्ण है। यदि कोई भी लक्षण दो सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। घरेलू उपचार से बचें। संतुलित आहार और शारीरिक गतिविधि से जोखिम कम रहता है।