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तीन जवान बलिदान: सियाचिन बेस कैंप पर भीषण हिमस्खलन, शवों की तलाश जारी; इलाके में बढ़ा खतरा

Tue, 09 Sep 2025 07:08 PM IST
विकास कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लद्दाख
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लद्दाख Published by: विकास कुमार Updated Tue, 09 Sep 2025 07:08 PM IST
सार

सेना ने अन्य जवानों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। एक अधिकारी ने बताया कि फिलहाल जवानों के शव की तलाश की जा रही है। 

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Avalanche hits Siachen base camp in Ladakh three soldiers killed
सियाचिन ग्लेशियर में एक जवान और दो अग्निवीर बलिदान - फोटो : x/@firefurycorps

विस्तार

लद्दाख के सियाचिन ग्लेशियर स्थित बेस कैंप पर मंगलवार को एक भीषण हिमस्खलन की चपेट में आने से सेना का एक जवान और दो अग्निवीर बलिदान हो गए। रक्षा सूत्रों के मुताबिक हादसा अचानक हुआ और बचाव दल तुरंत राहत कार्य में जुट गया। सेना ने अन्य जवानों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया है। फिलहाल इलाके में भारी बर्फबारी के चलते हिमस्खलन का खतरा बढ़ गया है। 

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हादसे में बलिदान हुए जवान की पहचान सिपाही मोहित कुमार, अग्निवीर नीरज कुमार चौधरी और अग्निवीर डाभी राकेश देवभाई के तौर पर हुई है। 

सियाचिन ग्लेशियर
सियाचिन ग्लेशियर पूरी दुनिया का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है। जहां पर तापमान शून्य से 60 डिग्री सेल्सियस नीचे चला जाता है। जिसकी वजह से वहां रहने वाले सैनिकों को फ्रॉस्टबाइट यानी की ज्यादा ठंड की वजह से शरीर के सुन्न हो जाने की परेशानी हो जाती है। माइनस शून्य से भी कम तापमान में तैनात सैनिकों को कई प्रकार की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सांस में तकलीफ के साथ ही दिमागी सूनापन की भी दिक्कतें आती हैं। कोल्ड इंज्युरी तो सामान्य है।

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1984 से लगातार डटे हुए हैं सैनिक    
सियाचिन ग्लेशियर भारत-पाक नियंत्रण रेखा के पास लगभग 78 किमी में फैला है। इसके एक तरफ  पाकिस्तान तो दूसरी तरफ चीन की सीमा अक्साई चीन है। सामरिक दृष्टि से इस ग्लेशियर का काफी महत्व है। 1984 से पहले इस जगह पर न तो भारत और न ही पाकिस्तान की सेना की उपस्थिति थी। 1972 के शिमला समझौते में सियाचिन इलाके को बेजान और बंजर करार दिया गया था, लेकिन इस समझौते में दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण नहीं हुआ था। वर्ष 1984 में खुफिया जानकारी मिली कि पाकिस्तान सियाचिन ग्लेशियर पर कब्जा करने की कोशिश कर रहा है। इसके बाद 13 अप्रैल 1984 को भारत ने अपनी सेना तैनात कर दी। यहां पर कब्जे के लिए सेना ने ऑपरेशन मेघदूत चलाया था।

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क्यों है सियाचिन इतना खास?
सियाचिन ग्लेशियर का क्षेत्र पाक अधिकृत कश्मीर (PoK), अक्साई चिन और शक्सगाम घाटी से सटा हुआ है, जिसे पाकिस्तान ने 1963 में चीन को सौंप दिया था। यह भारत के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण इलाका है क्योंकि इससे दुश्मन की हरकतों पर नजर रखी जा सकती है। इसके साथ ही यह स्थान लेह से गिलगित आने-जाने वाले रास्तों को भी नियंत्रित करता है, जिससे इसकी सैन्य और रणनीतिक अहमियत और बढ़ जाती है।
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