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Jammu News: असिस्टेंट प्रोफेसरों के निकाले 420 पदों में संस्कृत को जगह नहीं, छात्र बोले-यह देवभाषा की अनदेखी
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। प्रदेश के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के 420 भरे जाएंगे। उर्दू, अरबी, फारसी आदि के पद भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन संस्कृत को नजर अंदाज किया गया है। संस्कृत के पद न निकालने पर छात्रों व शोधार्थियों में रोष है। उनका कहना है कि डिग्री कॉलेज पुरमंडल, डिग्री कॉलेज पलौड़ा, डिग्री कॉलेज हीरानगर, डिग्री कॉलेज नौशेरा समेत करीब 17 कॉलेजों में संस्कृत पढ़ाई जाती है, पर संस्कृत के पद न निकाल कर इसकी पढ़ाई कर रहे युवाओं के भविष्य की अनदेखी की जा रही है।
जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के छात्रों व शोधार्थियों ने कहा कि जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग प्रदेश के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर्स के 420 पद भरेगा। अधिसूचना के अनुसार उर्दू, फारसी, अरबी, इस्लामिक स्टडी, कश्मीरी भाषा, हिंदी, पंजाबी सहित अन्य विषयों के पद निकाले हैं, पर संस्कृत का जिक्र नहीं है। इसका खामियाजा संस्कृत डिग्री धारकों को भुगतना पड़ रहा है।
जम्मू विश्वविद्यालय सहित कैंपस में होने वाली भर्ती में संस्कृत को अनदेखा किया गया है। पहले जारी अधिसूचनाओं में भी संस्कृत को नजरअंदाज किया गया था। जम्मू-कश्मीर प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा केंद्र रहा है, लेकिन अभी तक संस्कृत को प्रदेश में उचित स्थान नहीं मिल पाया है।
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नरेश शर्मा, छात्र, संस्कृत
देवभाषा संस्कृत के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह सभी भाषाओं की जननी है। अन्य सभी भाषाओं के रिक्त पदों को भरने की मंजूरी दी गई, लेकिन संस्कृत का नाम नहीं है। प्रशासन से मांग है कि संस्कृत के पद भी भरे जाएं।
वितेश शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू
संस्कृत के ज्ञान के बिना मनुष्य अपना वास्तविक कर्म नहीं कर सकता। इसका महत्व सभी को समझना होगा। हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में इसे अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाया जाए। रिक्त पदों को भरा जाए।
-राकेश शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू
कश्मीरी, उर्दू, अरबी आदि विषयों के पद भरे जा रहे हैं, लेकिन संस्कृत को नजरअंदाज किया गया है। यह संस्कृत में शोध कर रहे युवाओं के भविष्य की भी अनदेखी है। प्रशासन से मांग है कि जल्द संस्कृत के पदों को भरा जाए।
- रमणीक शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू
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जम्मू। प्रदेश के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसरों के 420 भरे जाएंगे। उर्दू, अरबी, फारसी आदि के पद भरने के लिए आवेदन मांगे गए हैं, लेकिन संस्कृत को नजर अंदाज किया गया है। संस्कृत के पद न निकालने पर छात्रों व शोधार्थियों में रोष है। उनका कहना है कि डिग्री कॉलेज पुरमंडल, डिग्री कॉलेज पलौड़ा, डिग्री कॉलेज हीरानगर, डिग्री कॉलेज नौशेरा समेत करीब 17 कॉलेजों में संस्कृत पढ़ाई जाती है, पर संस्कृत के पद न निकाल कर इसकी पढ़ाई कर रहे युवाओं के भविष्य की अनदेखी की जा रही है।
जम्मू विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के छात्रों व शोधार्थियों ने कहा कि जम्मू कश्मीर लोक सेवा आयोग प्रदेश के कॉलेजों में असिस्टेंट प्रोफेसर्स के 420 पद भरेगा। अधिसूचना के अनुसार उर्दू, फारसी, अरबी, इस्लामिक स्टडी, कश्मीरी भाषा, हिंदी, पंजाबी सहित अन्य विषयों के पद निकाले हैं, पर संस्कृत का जिक्र नहीं है। इसका खामियाजा संस्कृत डिग्री धारकों को भुगतना पड़ रहा है।
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जम्मू विश्वविद्यालय सहित कैंपस में होने वाली भर्ती में संस्कृत को अनदेखा किया गया है। पहले जारी अधिसूचनाओं में भी संस्कृत को नजरअंदाज किया गया था। जम्मू-कश्मीर प्राचीन काल से ही संस्कृत भाषा केंद्र रहा है, लेकिन अभी तक संस्कृत को प्रदेश में उचित स्थान नहीं मिल पाया है।
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नरेश शर्मा, छात्र, संस्कृत
देवभाषा संस्कृत के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। यह सभी भाषाओं की जननी है। अन्य सभी भाषाओं के रिक्त पदों को भरने की मंजूरी दी गई, लेकिन संस्कृत का नाम नहीं है। प्रशासन से मांग है कि संस्कृत के पद भी भरे जाएं।
वितेश शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू
संस्कृत के ज्ञान के बिना मनुष्य अपना वास्तविक कर्म नहीं कर सकता। इसका महत्व सभी को समझना होगा। हर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय में इसे अनिवार्य विषय के तौर पर पढ़ाया जाए। रिक्त पदों को भरा जाए।
-राकेश शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू
कश्मीरी, उर्दू, अरबी आदि विषयों के पद भरे जा रहे हैं, लेकिन संस्कृत को नजरअंदाज किया गया है। यह संस्कृत में शोध कर रहे युवाओं के भविष्य की भी अनदेखी है। प्रशासन से मांग है कि जल्द संस्कृत के पदों को भरा जाए।
- रमणीक शर्मा, शोधार्थी, संस्कृत विभाग, जेयू