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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Assembly elections possible Next year in Jammu and Kashmir draft report of Delimitation Commission ready

जम्मू-कश्मीर: अगले साल विधानसभा चुनाव संभव, परिसीमन आयोग की मसौदा रिपोर्ट तैयार, सियासी गतिविधियां भी तेज

Sun, 28 Nov 2021 10:12 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sun, 28 Nov 2021 10:12 PM IST
सार

जम्मू-कश्मीर में नए सिरे से परिसीमन के बाद विधानसभा में 90 सीटें होने की संभावना है। पिछली विधानसभा में 87 सीटें थीं, जिनमें से चार लद्दाख क्षेत्र की थीं, जो अब एक अलग केंद्र शासित प्रदेश है। घाटी में 47 और जम्मू क्षेत्र में 36 सीटें थीं। सूत्र बताते हैं कि जम्मू क्षेत्र में कम से कम छह सीटें जोड़ी जाएंगी और घाटी में मौजूदा विधानसभा क्षेत्रों में से दो नए विधानसभा क्षेत्र बनाए जाएंगे। इसके अलावा जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजातियों, अनुसूचित जाति आदि के लिए विधानसभा क्षेत्र आरक्षित होंगे, जो इस केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग राजनीतिक परिदृश्य पेश करेंगे। पिछली राज्य विधानसभा में पीडीपी के खाते में 28, भाजपा को 25, नेशनल कांफ्रेंस को 15 और कांग्रेस के पास 12 सीटें थीं।
 

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Assembly elections possible Next year in Jammu and Kashmir draft report of Delimitation Commission ready
जम्मू-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव अगले साल हो सकते हैं। इसको देखते हुए जम्मू-कश्मीर के विभिन्न राजनीतिक दलों ने 5 अगस्त 2019 के बाद पहली बार राजनीतिक जमीन पर अपना काम शुरू कर दिया है। सूत्र बताते हैं कि परिसीमन आयोग ने जम्मू-कश्मीर में कुछ पुरानी विधानसभा सीटों के नए और पुनर्गठन की अपनी मसौदा रिपोर्ट पूरी कर ली है। इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना देसाई कर रही हैं। बताया कि परिसीमन मसौदा रिपोर्ट तैयार है। अब इसे नेशनल कॉन्फ्रेंस के तीन लोकसभा सदस्यों (डॉ.फारूक अब्दुल्ला, हसनैन मसूदी और अकबर लोन) और भाजपा के जितेंद्र सिंह और जुगल किशोर शर्मा सहित सहयोगी सदस्यों के साथ साझा किया जाएगा। आयोग को पहले ही सूचित किया जा चुका है कि मार्च 2022 में समाप्त होने वाली इसकी समय अवधि का कोई और विस्तार नहीं होगा।

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नेशनल कांफ्रेंस(नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, जम्मू-कश्मीर नेशनल पैंथर्स पार्टी, जम्मू-कश्मीर अपनी पार्टी, पीपुल्स कांफ्रेंस के नेताओं सहित सभी प्रमुख राजनीतिक दलों और अन्य छोटे समूहों ने बैठकों और रैलियों के माध्यम से जनता के साथ सार्वजनिक संपर्क शुरू कर दिया है।
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पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती की चिनाब घाटी की यात्रा के बाद, नेकां के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने शनिवार को क्षेत्र का दौरा शुरू किया। रविवार को वह डोडा में थे। भाजपा ने अपने पार्टी कैडर को पहले ही बता दिया है कि विधानसभा चुनाव आगे नहीं टाले जाएंगे और ये अगले साल वार्षिक अमरनाथ यात्रा से पहले हो रहे हैं जो हर साल जून के अंतिम सप्ताह में शुरू होती है, लेकिन इस साल महामारी के कारण इसे रद्द कर दिया गया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद दक्षिण कश्मीर के दौरे पर हैं। शनिवार को कुलगाम के देवसर में थे जबकि रविवार को उन्होंने अनंतनाग जिले के कोकरनाग में सभा को संबोधित किया।
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नेकां, बीजेपी, पीडीपी, कांग्रेस और अन्य के वरिष्ठ नेताओं के करीबी सूत्रों का कहना है कि इनमें से कोई भी दल यह नहीं मानता है कि उसे अपनी नई विधानसभा में बहुमत मिल सकता है। नेकां के करीबी माने जाने वाले एक पूर्व नौकरशाह ने कहा, इन दलों के वरिष्ठ नेता सार्वजनिक रूप से या मीडिया से जो कुछ भी कहते हैं, तथ्य यह है कि उनमें से किसी को भी अपने दम पर पूर्ण बहुमत प्राप्त करने का विश्वास नहीं है।

भाजपा में नजर आ सकते हैं नए चेहरे

इस बीच भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े  सूत्रों का कहना है कि दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने जमीनी हकीकत पर ध्यान दिया है। ऐसे में वर्ष 2014 के चुनाव में उतरे ज्यादातर भाजपा नेता आगामी विधानसभा चुनाव में टिकट न पाएं तो किसी को आश्चर्य नहीं होना चाहिए। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के एक सूत्र ने कहा- स्थानीय नेतृत्व में कई ऐसे उभरते चेहरे हैं और जिन्हें 2022 के विधानसभा चुनावों में उतारने का फैसला किया गया है।

पीपुल्स कांफ्रेंस व अपनी पार्टी भी देगी चुनौती

कश्मीर घाटी में, नेकां और पीडीपी को एक-दूसरे और सज्जाद गनी लोन की अध्यक्षता वाली पीसी और सैयद अल्ताफ बुखारी की अध्यक्षता वाली अपनी पार्टी जैसे अन्य राजनीतिक दलों से चुनौतियों का सामना करने की संभावना है। पीसी(पीपुल्स कांफ्रेंस) और अपनी पार्टी अभी भी एनसी(कांफ्रेंस) और पीडीपी(पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) के रूप में जमीनी स्तर के कैडर बनाने से दूर हो सकते हैं, लेकिन इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये दोनों पार्टियां कुछ सीटों पर परेशान कर सकती हैं।

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