बाढ़ दरकिनार, सरकार को चुनाव की दरकार
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बाढ़ की विभीषिका के बावजूद रियासत में विधानसभा चुनाव समय पर कराने की तैयारी तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय और रियासत सरकार चुनाव टालने के पक्ष में नहीं है। जम्मू कश्मीर में नवंबर-दिसंबर में चुनाव कराया जाना है।
बाढ़ की तबाही के बाद चुनाव टलने के आसार नजर आने लगे थे लेकिन रियासत सरकार का मानना है कि अगले एक सप्ताह में हालात और सुधर जाएंगे। इसलिए चुनाव टालकर राज्यपाल शासन (विशेष राज्य का दर्जा होने के कारण यहां राष्ट्रपति नहीं राज्यपाल शासन लगता है।) लागू किया जाना उचित नहीं होगा।
चुनाव आयोग इस मसले पर गंभीरता से विचार कर रहा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय, रियासत सरकार और रियासत के मुख्य चुनाव अधिकारी की रिपोर्ट के बाद ही आयोग अंतिम फैसला लेगा। सियासी दलों से भी विचार-विमर्श संभव है।
सभी संबंधित पक्षों की रिपोर्ट के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त का दोनों चुनाव आयुक्तों के साथ अगले माह के पहले सप्ताह में रियासत का दौरा संभव है। उसी दौरे में चुनाव के संबंध में आधिकारिक घोषणा हो सकती है।
मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों का दौरा संभव
गौरतलब है कि बाढ़ ने श्रीनगर के अलावा दक्षिणी कश्मीर और जम्मू संभाग के राजोरी-पुंछ में ज्यादा कहर ढाया है। लगभग 300 लोगों की मौतें हुईं हैं और 200 से अधिक लोग लापता हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित भी हुए हैं।
बाढ़ प्रभावित इलाकों में प्रशासन एक पखवाड़े से राहत और बचाव कार्यों में ही जुटा रहा है। इस कारण मतदाता सूचियों को अंतिम रूप देने का काम कुछ इलाकों में बाधित हुआ। हालांकि मतदाताओं द्वारा आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि 16 अगस्त ही थी और उसके बाद जिला निर्वाचन अधिकारियों द्वारा डाटा संग्रहित करने का काम शुरू हो गया था।
बाढ़ सितंबर के पहले सप्ताह में आई। तब तक मतदाता सूची को अंतिम रूप देने का काम काफी हद तक पूरी हो चुका था। अब इसके प्रकाशन की अंतिम तिथि एक अक्तूबर है। सभी जिला निर्वाचन अधिकारी इस काम में जुट गए हैं। मुख्य चुनाव अधिकारी ने कश्मीर के जिला निर्वाचन अधिकारियों से इस बाबत रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी जुटाने के बाद मुख्य चुनाव अधिकारी की ओर से आयोग को रिपोर्ट भेजी जाएगी। सूत्रों का मानें तो फाइनल मतदाता सूची तय तिथि एक अक्तूबर को प्रकाशित हो सकती है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पहले ही कहा है कि चुनाव को टालकर राष्ट्रपति शासन के लिए माहौल बनाना उचित नहीं होगा।