विधानसभा चुनावों को लेकर घाटी में मचा घमासान
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इसके अलावा कुछ दिन पहले वह दिल्ली में केन्द्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मिलकर भी इस मुद्दे को उठा चुके हैं। इसी कड़ी में उन्होंने आज बयान जारी कर इसे भावनात्मक रंग देने की कोशिश की।
बकौल उमर, इन हालातों में चुनाव हुए तो पहले मैं अपना घर ठीक करुंगा या वोट देने जाऊंगा। उन्होंने इसके लिए विरोधी पार्टियों पर भी निशाना साधा कि कुछ दल जानबूझकर लोगों की समस्याओं को दरकिनार कर चुनाव कराने पर अड़े हुए हैं। उन्हें लोगों के पुर्नवास से कोई मतलब नहीं है।
हालांकि इस बीच यह भी उम्मीद जताई जा रही है कि चुनाव आयोग दीपावली के बाद कभी भी जम्मू-कश्मीर और झारखंड में चुनावों की घोषणा कर सकता है। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री का कश्मीर दौरा भी शायद इसी कड़ी का हिस्सा है। जहां वह चुनावों को देखते हुए लोगों को खुद से जोड़ सकें।
'पहले मैं अपना घर ठीक करुंगा या वोट दूंगा'
घाटी में चुनावों को लेकर खींचतान तेज हो गई है। बाढ़ की मार से जूझ रही रियासत में जहां उमर सरकार चुनावों को टालने के पक्ष में है वहीं बाकी दल समय पर चुनाव कराना चाहते हैं।
दूसरी ओर मुद्दे को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए उमर ने कहा है कि अगर अब चुनाव हुए तो काफी लोगों चुनावों में शिरकत नहीं कर पाएंगे। बकौल उमर बाढ़ से तबाह हुए लोग अपने घरों को देखेंगे या मतदान करने जाएंगे।
हालांकि यह कहकर उमर ने फिर गेंद चुनाव आयोग के पाले में डाल दी कि चुनावों पर अंतिम निर्णय आयोग को लेना है इसलिए बेहतर वही जानें। बता दें कि इससे पहले चुनाव आयोग श्रीनगर का दौरा कर घाटी में चुनाव कराने की संभावनाओं को टटोल चुका है।
चुनाव टालने के प्रयास में लगे उमर अब्दुल्ला
जिसके बाद से इस बात की उम्मीद जताई जा रही थी कि घाटी में चुनाव तय समय दिसंबर में ही होंगे। हरियाणा और महाराष्ट्र में चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव आयोग का अब अगला ध्यान जम्मू कश्मीर और झारखंड में चुनाव कराने पर है। लेकिन घाटी में चुनावों को लेकर खींचतान तेज हो गई है।
बाढ़ के बाद उपजी परिस्थितियों के चलते जहां सत्तारूढ़ नेशनल कान्फ्रेंस चुनाव टालने के पक्ष में है वहीं दूसरे दल एकजुट होकर समय पर चुनाव कराने की मांग कर रहे हैं।
असल में हाल फिलहाल उमर सरकार बाढ़ पीड़ितों के पुर्नवास में पूरा ध्यान लगाए हुए है, ऐसे में न उसे चुनावों की तैयारियों को लेकर समय मिल रहा है न ही हाल फिलहाल उसके लिए हालात आसान हैं।
बाकी दल समय से चुनाव कराने के पक्ष में
बाढ़ के बाद से ही दूसरे दल राहत कार्यों में ढिलाई का आरोप लगाकर उसे घेरने में लगे हुए हैं। वहीं आम जनता में भी बाढ़ के बाद से लगातार असंतोष छाया हुआ है।
ऐसे में साफ है कि हाल फिलहाल चुनाव हुए तो इसका खामियाजा सत्तारूढ़ दल होने के कारण उमर सरकार को भुगतना पड़ सकता है। जबकि विरोधी इसी बात का फायदा उठाने के लिए समय पर चुनाव कराने की मांग पर अड़े हुए हैं।
हालांकि चुनाव टालने के लिए मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी ओर से भरसक प्रयास कर रहे हैं, चुनाव आयोग के श्रीनगर दौरे के दौरान भी उन्होंने आयोग को अपनी मंशा जता दी थी।