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Jammu Kashmir: डीजल महंगा होने के साथ ही जम्मू में महंगाई की आहट, मंडियों और रसोई पर पड़ेगा असर

Sun, 22 Mar 2026 12:01 PM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Sun, 22 Mar 2026 12:01 PM IST
सार

डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण जम्मू में ढुलाई लागत बढ़ रही है, जिससे मंडियों और खुदरा बाजार में सब्जियों, राशन और दूध के दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। ग्राहक अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं और छोटे विक्रेता महंगे स्टॉक के दबाव में हैं।

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As diesel becomes expensive, the footsteps of inflation are being heard in Jammu.
Petrol Pumps - फोटो : FREEPIK

विस्तार

डीजल महंगा होते ही जम्मू में महंगाई के कदमों की आहट सुनाई देने लगी है। फिलहाल दामों में बड़ा उछाल नहीं आया है लेकिन मंडियों में हलचल और बढ़ती ढुलाई लागत यह संकेत दे रही है कि आने वाले दिनों में रसोई से लेकर सफर तक हर खर्च बढ़ सकता है।

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विशेषज्ञों के अनुसार डीजल महंगा होने का असर एक क्रम में बाजार तक पहुंचता है। पहले ढुलाई महंगी होती है, फिर मंडियों में दाम बढ़ने लगते हैं और उसके बाद खुदरा बाजार में महंगाई दिखती है। नरवाल मंडी के व्यापारियों के अनुसार पिछले एक हफ्ते में बाहरी राज्यों से आने वाले माल की ढुलाई 10 से 15 फीसदी तक महंगी हो गई है। ट्रकों का किराया तीन से चार हजार रुपये तक बढ़ा है।
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आढतिया रमेश जम्वाल ने बताया कि हरी सब्जियों में पांच से दस फीसदी तक बढ़ोतरी देखी जा रही है। आगे और दाम बढ़ने की आशंका है। डीजल के दाम बढ़ने से सब्जियों के साथ दूध और राशन पर खर्च बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। नानक नगर की रहने वाली गृहणी सतवंत कौर ने बताया कि यदि आगे एलपीजी सिलिंडर महंगा हुआ तो रसोई का बजट और बिगड़ सकता है।
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किराना दुकानदारों का कहना है कि थोक बाजार से आने वाला नया स्टॉक महंगा पड़ सकता है। उनका अनुमान है कि अगले कुछ दिनों में राशन के दाम पांच से सात फीसदी तक बढ़ सकते हैं। साथ ही ग्राहक अब जरूरत के हिसाब से ही खरीदारी कर रहे हैं, जिससे बाजार में मांग पर भी असर पड़ने लगा है। वेयरहाउस में राशन कारोबारी दयाल गुप्ता ने बताया कि महंगा माल मिलने से उन्हें भी खुदरा दाम बढ़ाने पड़ सकते हैं। इससे छोटे विक्रेताओं पर सीधा असर पड़ रहा है।

जम्मू की निर्भरता दूसरे राज्यों पर पहले भी दिख चुका है यही ट्रेंड
अर्थशास्त्री फालेन्द्र सूदन कहते हैं कि जम्मू में ज्यादातर जरूरी सामान बाहरी राज्यों से आता है और सप्लाई पूरी तरह सड़क मार्ग पर निर्भर है। ऐसे में डीजल की कीमत बढ़ते ही इसका असर यहां जल्दी और ज्यादा दिखाई देता है। पिछले वर्षों में भी देखा गया है कि ईंधन महंगा होने के कुछ दिनों के भीतर ही जम्मू में सब्जी और ट्रांसपोर्ट के दाम बढ़ने लगते हैं। इस बार भी वैसा ही रुझान देखने को मिल सकता है।

पड़ोसी राज्यों से कम है प्रदेश की महंगाई दर
ताजा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों के अनुसार फरवरी 2026 में जम्मू-कश्मीर में महंगाई दर करीब 1.86 फीसदी रही है, जो कई पड़ोसी राज्यों के मुकाबले कम है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में महंगाई दर इससे अधिक दर्ज की गई है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल जम्मू-कश्मीर में महंगाई का स्तर अपेक्षाकृत नियंत्रित है लेकिन यहां बाहरी राज्यों पर निर्भरता ज्यादा होने के कारण असर थोड़ी देर से दिखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे ढुलाई लागत का दबाव बढ़ेगा, वैसे-वैसे पड़ोसी राज्यों की तरह जम्मू में भी महंगाई का असर तेजी से दिखाई दे सकता है।

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