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Article 370: जम्मू-कश्मीर में अब रणबीर दंड संहिता की जगह आईपीसी होगी लागू
Mon, 05 Aug 2019 04:30 PM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Mon, 05 Aug 2019 04:30 PM IST
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केंद्र की मोदी सरकार ने एक एतिहासिक फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने और इसे केंद्रशासित प्रदेश बनाने का प्रस्ताव रखा जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई। इस फैसले के बाद अब जम्मू-कश्मीर में कई कानूनी बदलाव होंगे। सबसे बड़ा बदलाव ये होगा कि यहां रणबीर दंड संहिता की जगह भारतीय दंड संहिता लागू होगी।
देश में कानूनी मामलों में भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई होती है लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं होता है। यहां रणबीर दंड संहिता लागू होती है और इसी के अनुसार सजा तय होती है। यहां कभी भारतीय दंड संहिता का अस्तित्व ही नहीं रहा है। लेकिन अब अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद अब यहां भारतीय दंड संहिता लागू होगी।
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देश में कानूनी मामलों में भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई होती है लेकिन जम्मू-कश्मीर में ऐसा नहीं होता है। यहां रणबीर दंड संहिता लागू होती है और इसी के अनुसार सजा तय होती है। यहां कभी भारतीय दंड संहिता का अस्तित्व ही नहीं रहा है। लेकिन अब अनुच्छेद 370 को हटाए जाने के बाद अब यहां भारतीय दंड संहिता लागू होगी।
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क्या है रणबीर दंड संहिता
आईपीसी यानी इंडियन पीनल कोड या भारतीय दंड संहिता के प्रावधान जम्मू और कश्मीर को छोड़कर देश के सभी राज्यों में लागू होते हैं। तो फिर सवाल उठता है कि जम्मू और कश्मीर में अगर आईपीसी लागू नहीं होता तो ये कैसे तय किया जाता है कि किस अपराध के लिए किस तरह की सजा दी जाएगी। रणबीर पीनल कोड या रणबीर दंड संहिता इसी सवाल का जवाब है। जम्मू और कश्मीर राज्य में आईपीसी की जगह आरपीसी लागू होता है जिसे भारतीय दंड संहिता की तर्ज पर ही तैयार किया गया था। चूंकि संविधान का अनुच्छेद 370 जम्मू और कश्मीर राज्य को स्वायत्ता का दर्जा देता है, इसलिए भारत संघ के सभी कानून इस राज्य में सीधे लागू नहीं होते। आईपीसी भी ऐसा ही कानून है जो यहां लागू नहीं होता और इसकी जगह यहां आरपीसी लागू था।
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आईपीसी और आरपीसी में फर्क
आरपीसी, आईपीसी की ही तरह एक अपराध संहिता है जिसमें अपराधों की परिभाषाएं और उसके लिए तय की गई सजा के बारे में बताया गया है। चूंकि रणबीर पीनल कोड खास तौर पर जम्मू और कश्मीर के लिए तैयार किया गया था इसलिए आईपीसी से कुछ मामलों में येअलग है। कुछ धाराओं में 'भारत' की जगह 'जम्मू और कश्मीर' का इस्तेमाल किया गया है। विदेशी जमीन पर या समुद्री यात्रा के दौरान जहाज पर किए गए अपराध से संबंधित धाराओं को आरपीसी से हटा दिया गया था। वैसे एक बात और जानने लायक है कि आईपीसी की कई धाराएं भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रावधानों के साथ लागू होती है। यह जम्मू और कश्मीर में ब्रिटिश शासन के वक्त से लागू है। उस वक्त जम्मू और कश्मीर एक स्वतंत्र राज्य था और डोगरा वंश के रणबीर सिंह यहां के राजा थे।रणबीर दंड संहिता में नहीं थे ये कानून
- भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 4 कंप्यूटर के माध्यम से किए गए अपराधों को व्याख्यित और संबोधित करती है, लेकिन रणबीर दंड संहिता में इसका कोई उल्लेख नहीं है। आईपीसी की धारा 153 सीएए के तहत सार्वजनिक सभाओं या जमावड़ों के दौरान जान बूझकर शस्त्र लाने को दंडनीय अपराध माना जाता है, जबकि रणबीर दंड संहिता में इस महत्वपूर्ण विषय का उल्लेख नहीं है।
- आईपीसी की धारा 195-ए के तहत अगर कोई किसी को झूठी गवाही या बयान देने के लिये प्रताड़ित करता है, तो वह सजा का हकदार माना जाता है, जबकि रणबीर दंड संहिता में इस संबंध में कोई निर्देश नहीं है। आईपीसी की धारा 281 के तहत जो व्यक्ति किसी नाविकों को प्रकाश, निशान या पेरक में काम आने वाले पहियों से गुमराह करता है, तो वह सजा का हकदार है, जबकि रणबीर दंड संहिता में ऐसा कुछ नहीं है।
- भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी, दहेज के कारण होने वाली मौतों से संबंधित है, लेकिन रणबीर दंड संहिता में इसका कोई उल्लेख नहीं है। रणबीर दंड संहिता की धारा 190 के तहत सरकार ऐसे किसी भी व्यक्ति को सजा दे सकती है, जो सरकार द्वारा अमान्य या जब्त की गई सामग्री का प्रकाशन या वितरण करता है। इस मामले में अपराध का निर्धारण करने का अधिकार मुख्यमंत्री को है। यह विशेष धारा पत्रकारिता, सोच, विचार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बुरी तरह से प्रभावित करती है।