सैनिकों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं 'बूबी ट्रैप', पठानकोट आतंकी हमले में हुई थी अधिकारी की मौत
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झज्जर कोटली आतंकी हमले में जब आतंकी के शव को रस्सियों से खींचे जाने का जिक्र आया तो सैन्य अधिकारियों ने इसे 'बूबी ट्रैप' बताया और रामगढ़ में मंगलवार को बीएसएफ जवान का शव मिला तो जारी प्रेस विज्ञप्ति में बीएसएफ ने भी जिस 'बूबी ट्रैप' का जिक्र किया वह दरअसल आतंकियों के शवों में बांधे गए आरडीएक्स, बमों या ग्रनेडों के बने होते हैं जो सैनिकों के लिए जानलेवा साबित होते हैं। बीते वर्ष पठानकोट आतंकी हमले में भारतीय सेना ने एनएसजी के एक सर्वोच्च अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन को खोया था ।
झज्जर कोटली में 34 घंटे तक चले आतंकी हमले के बाद तीनों आतंकियों को सेना द्वारा मार गिराया गया और तीन अधिकारियों सहित 12 जवान घायल हो गए। तीसरे आतंकी के शव को जब सेना ने रस्सियों के साथ बांध कर खींचा तो कई राजनेताओं व मानवाधिकारी के ठेकेदारों ने इसे अमानवीय करार देते हुए सेना पर सवाल खड़े किए पर सैन्य अधिकारियों ने इसे संभवत: 'बूबी ट्रैप' करार देते हुए ऐसा करना स्टैंडर्ड ऑपरेशनल प्रोसिजर (एसओपी) के तहत अनिवार्य बताया ताकि किसी भी सैनिक को 'बूबी ट्रैप' में फंस कर अपनी जान न गंवानी पड़े।
क्या होता है 'बूबी ट्रैप'
सरल शब्दों में यदि 'बूबी ट्रैप' का वर्णन करना हो तो बूबी शब्द बाड़ी से बना है और ट्रैप पूरी तरह फंसाने को कहा जाता है। इसका इस्तेमाल अक्सर आतंकी संगठन बड़े आतंकी हमलों की तैयारी के समय करते हैं जब वह आतंकियों के शरीर के ऊपर आरडीएक्स विस्फोटक या ग्रनेडों की एक प्लेट लगा देते हैं जो आगे पीछे से स्टील से ढकी हुई होती हैं और सभी ग्रनेड तारों के सर्किट से जुड़े हुए होते हैं। जब आतंकी हमलों में मारे जाते हैं तो उनके शव के पास सैन्य अधिकारी जाकर शव की जांच करते हैं और तारों के सर्किट के हिलने मात्र से धमाका होने की पूरी आशंका रहती है।
मंगलवार को सांबा के रामगढ़ सेक्टर में मारे गए सीमा सुरक्षा बल के जवान के शव पर भी 'बूबी ट्रैप' लगे होने की आशंका के चलते बीएसएफ के अधिकारियों ने यह पहले सुनिश्चित कर लिया कि ऐसा कुछ नहीं है और तभी जवान के शव को कब्जे में लिया गया।
पठानकोट आतंकी हमले में 'बूबी ट्रैप' ने ली थी उच्च अधिकारी की जान
बीते वर्ष हुए पठानकोट आंतकी हमले में एनएसजी के उच्च अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन जब मारे तीनों आतंकियों के शवों की जांच कर रहे थे तो तीसरे शव पर 'बूबी ट्रैप' लगा हुआ था जिसमें फंस कर वह शहीद हो गए। हालांकि एनएसजी के तत्कालीन चीफ ने तब भी कहा था कि उक्त अधिकारी ने एसओपी का पूरा पालन किया लेकिन 'बूबी ट्रैप' एक नवीनतम तकनीक से लगा हुआ था।
'बूबी ट्रैप' को लेकर बड़े कड़े दिशा निर्देश
पठानकोट में उच्च अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन को खोने के बाद उच्चतम स्तर 'बूबी ट्रैप' को लेकर मंथन हुआ और कड़े दिशा निर्देश तुरंत जारी किए गए। इनमें आतंकी हमला होने पर मारे गए आतंकियों के शरीर से दूरी बनाए रखने और उसे रस्सियों से बांध कर खींचने या उल्टा- सीधा करने की प्रक्रिया को एसओपी में शामिल किया गया था।