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पहली बार देश की रक्षा में जान गंवाने वाले ट्रैकर डॉग को मिला युद्ध सम्मान
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Sun, 14 Aug 2016 09:35 PM IST
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सेना का ट्रैकर डॉग
- फोटो : File Photo
आतंकियों की घुसपैठ रोकते शहीद हुई मानसी और उसके हैंडलर बशीर अहमद वार की जोड़ी को मरणोपरांत वीरता पुरस्कार का सम्मान दिया गया है।
भारतीय सेना की ट्रैकर डॉग यूनिट के किसी सदस्य को युद्ध सम्मान मिलने का यह पहला अवसर है।160 टेरिटोरियल आर्मी की ट्रैकर डॉग युनिट की सदस्य चार वर्षीय मानसी (लेब्राडॉर) और उसके हैंडलर बशीर अहमद वार ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से घुसपैठ कर उत्तरी कश्मीर में दाखिल हुए आतंकियों के समूह को एन मौके आगे बढ़ने से रोक दिया था।
आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मानसी और हैंडलर बशीर की जोड़ी शहीद हो गई थी लेकिन सैन्य दल ने आतंकियाें का सफाया करने में कामयाबी हासिल कर ली थी।
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भारतीय सेना की ट्रैकर डॉग यूनिट के किसी सदस्य को युद्ध सम्मान मिलने का यह पहला अवसर है।160 टेरिटोरियल आर्मी की ट्रैकर डॉग युनिट की सदस्य चार वर्षीय मानसी (लेब्राडॉर) और उसके हैंडलर बशीर अहमद वार ने पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) से घुसपैठ कर उत्तरी कश्मीर में दाखिल हुए आतंकियों के समूह को एन मौके आगे बढ़ने से रोक दिया था।
आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मानसी और हैंडलर बशीर की जोड़ी शहीद हो गई थी लेकिन सैन्य दल ने आतंकियाें का सफाया करने में कामयाबी हासिल कर ली थी।
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क्या है ट्रैकर डॉग की भूमिका?
ट्रैकर डॉग
- फोटो : File Photo
मानसी को मरणोपरांत मेंशन आफ डिसपैचेस प्रशस्ति पत्र दिया गया है। सर्वोच्च बलिदान के लिए मानसी का नाम गजट ऑफ इंडिया में अंकित होगा। कुपवाड़ा निवासी उसके हैंडलर बशीर अहमद वार को मरणोपरांत सेना मेडल दिया गया है।
21 जुलाई 2015 को दो आतंकियों को ढेर करने के बाद मानसी और बशीर की जोड़ी अगस्त महीने में टंगधार सेक्टर के जंगलों में आतंकियों की तलाश को निकले थे। पर्वतीय चोटी को छूते बादल और धुंध के बीच मानसी ने आतंकियों की आहट मिलते ही भौंकना शुरू कर दिया।
मानसी के हैंडलर बशीर ने बिना समय गंवाए आतंकियों पर फायरिंग शुरू कर दी और अतिरिक्त सैन्य मदद का संकेत भेज दिया। आतंकियों की गोली लगने से पहले मानसी धराशायी हो गई और उसके बाद बशीर भी नीचे गिर गए। कुछ समय में सैन्य दल ने मौका संभालकर आतंकियों को ढेर कर दिया। घायल जांबाज सिपाही की तर्ज पर मानसी को रेस्क्यू किया गया, पर, उसकी जान नहीं बच पाई।
आतंक रोधी अभियानों में डॉग यूनिट के सदस्य मूक नायकों की भूमिका निभाते आ रहे हैं। कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ट्रैकर डॉग सुरक्षा बलों की मदद करते हैं। गार्ड डॉग रात के समय निगरानी और इंफेंट्री पेट्रोल डॉग बम और आईईडी की पहचान करने की ड्यूटी निभाते हैं।
21 जुलाई 2015 को दो आतंकियों को ढेर करने के बाद मानसी और बशीर की जोड़ी अगस्त महीने में टंगधार सेक्टर के जंगलों में आतंकियों की तलाश को निकले थे। पर्वतीय चोटी को छूते बादल और धुंध के बीच मानसी ने आतंकियों की आहट मिलते ही भौंकना शुरू कर दिया।
मानसी के हैंडलर बशीर ने बिना समय गंवाए आतंकियों पर फायरिंग शुरू कर दी और अतिरिक्त सैन्य मदद का संकेत भेज दिया। आतंकियों की गोली लगने से पहले मानसी धराशायी हो गई और उसके बाद बशीर भी नीचे गिर गए। कुछ समय में सैन्य दल ने मौका संभालकर आतंकियों को ढेर कर दिया। घायल जांबाज सिपाही की तर्ज पर मानसी को रेस्क्यू किया गया, पर, उसकी जान नहीं बच पाई।
आतंक रोधी अभियानों में डॉग यूनिट के सदस्य मूक नायकों की भूमिका निभाते आ रहे हैं। कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में ट्रैकर डॉग सुरक्षा बलों की मदद करते हैं। गार्ड डॉग रात के समय निगरानी और इंफेंट्री पेट्रोल डॉग बम और आईईडी की पहचान करने की ड्यूटी निभाते हैं।