जम्मू कश्मीर: कई स्थानों से सेना हटने को हुई राजी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू विश्वविद्यालय सहित रियासत में कई स्थानों पर सेना की ओर से कब्जा की गई जमीन पर से कब्जा हटाने पर सहमति बनी है। मंगलवार को मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की अध्यक्षता में लगभग दो साल बाद हुई सिविल-मिलिट्री मेलजोल कांफ्रेंस (सीएमएल) में यह तय हुआ कि समयबद्ध तरीके से सभी मसलों को हल किया जाएगा।
उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह ने जम्मू संभाग में जम्मू, सांबा, कठुआ तथा राजोरी की तारबंदी पर किसानों की समस्याओं तथा अन्य मुद्दों को प्रमुखता से उठाया।
बैठक में जम्मू विश्वविद्यालय के पास सेना ने भूमि के हस्तांतरण के मुद्दे पर अपने परिसर से सटी सड़क के उत्तर में विश्वविद्यालय परिसर के विस्तार के लिए जमीन देने पर सहमति व्यक्त की।
तारबंदी से प्रभावित किसानों को मुआवजे पर भी सहमति
बैठक में निर्णय लिया गया कि एक उच्च स्तरीय समिति भूमि के हस्तांतरण के लिए गठित की जाएगी। संभागीय आयुक्त जम्मू को अगले तीन महीने के भीतर जम्मू विश्वविद्यालय के विस्तार के लिए सेना द्वारा दी जा रही जमीन के एवज में सेना के लिए वैकल्पिक भूमि की पहचान करने का काम सौंपा गया।
बैठक में तारबंदी के पार गई जमीन का मुआवजा देने और हीरानगर के पास सेना के फायरिंग रेंज को शिफ्ट करने और वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने पर सहमति बनी। जम्मू हवाई अड्डे के विस्तार के बारे में मुख्यमंत्री को बताया गया कि जो बाधाएं आ रही थीं, उन्हें हटा दिया गया है।
संभागीय आयुक्त जम्मू ने बताया कि जम्मू हवाई अड्डे के पास भूमि खाली करने के लिए सेना के साथ बातचीत जारी है। इसमें रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार है। आईबी (अंतरराष्ट्रीय सीमा) और नियंत्रण रेखा (लाइन ऑफ कंट्रोल) के सांबा, जम्मू और राजोरी जिलों के क्षेत्रों में माइन हटाने के लिए सेना से अनुरोध किया गया।
विशेष रूप से उन इलाकों में जहां खेत हैं। इसके अलावा जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उसका सर्वे कर रक्षा मंत्रालय से उन्हें मुआवजा भी दिलवाया जाएगा।