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अपराजिता- हर क्षेत्र में हो रहा है नारी का सम्मान
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अपराजिता ....... आरएन टैगौर हायर सेकेंडरी स्कूल।
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जम्मू। अमर उजाला की अपराजिता-100 मिलियन स्माइल मुहिम के तहत आरएन टैगोर, नानक नगर में शुक्रवार को वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान छात्राओं ने अपने विचारों में नारी के पक्ष में होते हुए बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, भ्रूण हत्या जैसे कई मामलों पर प्रकाश डाला और कहा कि आज हर क्षेत्र में नारी का सम्मान हो रहा है। आज की बेटियां शैक्षिक, बैंकिंग, आईटी, मेडिकल आदि क्षेत्र के अलावा सुरक्षा बल में शामिल होकर पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। उनके कार्य को हर क्षेत्र में सराहना मिल रही है।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में राधिका शर्मा ने पहला, सुहानी मेहरा ने दूसरा और माजीदा खातून ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान सभी का यही कहना था कि महिला सशक्तीकरण जैसे गंभीर मुद्दे को उठाना अनिवार्य है। इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना जरूरी है। इस अवसर पर राधिका, जगप्रीत कौर आदि ने भाग लिया।
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अमर उजाला की तरफ से उठाया गया यह कदम सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रम आगे भी होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज नारी आत्मनिर्भर है। वह किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। घर के कामकाज के साथ दफ्तर, स्कूल के हर कार्य को बड़ी सहजता से निभा रही है। अगर एक बेटे को पढ़ाया जाए तो एक बेटा ही पढ़ेगा। वहीं अगर एक बेटी को पढ़ाया जाए तो पूरा परिवार पढ़ता है। दहेज प्रथा और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियां देश को बर्बाद कर रही हैं। यह बहुत अच्छा तरीका है जिसके जरिये महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दे को बहुत ही खूबसूरती से उठाया जा सकता है और जागरूकता भी फैलाई जा सकती है।
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-डॉ हितेश महाजन, प्रधानाचार्य
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नारी को भी अधिकार है अपना जीवन बिना किसी बाधा के जीने का। हिंदू धर्म में नारी को शक्ति का दर्जा दिया गया है, लेकिन दहेज के लोभियों के कारण इन्हें कई बार आत्महत्या करनी पड़ती है। जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता उस घर में कभी सुख-समृद्धि नहीं होती। इस तरह के कार्यक्रम के जरिये जागरूकता आती है। हर किसी को महिला सशक्तीकरण के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।
-सुहानी मेहरा, छात्रा
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हर महिला को यह समझने की जरूरत है कि अगर बेटी को जन्म नहीं दोगे तो बहु कहां से लाएंगे। भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों का समाधान निकाला जाना बहुत आवश्यक है। ताकि आने वाले समय में कोई भी बेटी को जन्म देते समय यह न सोचे कि कहीं हमारे घर पर बेटी जन्म न ले ले।
- जगप्रीत खालसा, छात्रा
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वाद-विवाद प्रतियोगिता में राधिका शर्मा ने पहला, सुहानी मेहरा ने दूसरा और माजीदा खातून ने तीसरा स्थान हासिल किया। इस दौरान सभी का यही कहना था कि महिला सशक्तीकरण जैसे गंभीर मुद्दे को उठाना अनिवार्य है। इसके बारे में ज्यादा से ज्यादा लोगों को जागरूक करना जरूरी है। इस अवसर पर राधिका, जगप्रीत कौर आदि ने भाग लिया।
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अमर उजाला की तरफ से उठाया गया यह कदम सराहनीय है। इस तरह के कार्यक्रम आगे भी होते रहने चाहिए। उन्होंने कहा कि आज नारी आत्मनिर्भर है। वह किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं है। घर के कामकाज के साथ दफ्तर, स्कूल के हर कार्य को बड़ी सहजता से निभा रही है। अगर एक बेटे को पढ़ाया जाए तो एक बेटा ही पढ़ेगा। वहीं अगर एक बेटी को पढ़ाया जाए तो पूरा परिवार पढ़ता है। दहेज प्रथा और भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियां देश को बर्बाद कर रही हैं। यह बहुत अच्छा तरीका है जिसके जरिये महिला सशक्तीकरण जैसे मुद्दे को बहुत ही खूबसूरती से उठाया जा सकता है और जागरूकता भी फैलाई जा सकती है।
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-डॉ हितेश महाजन, प्रधानाचार्य
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नारी को भी अधिकार है अपना जीवन बिना किसी बाधा के जीने का। हिंदू धर्म में नारी को शक्ति का दर्जा दिया गया है, लेकिन दहेज के लोभियों के कारण इन्हें कई बार आत्महत्या करनी पड़ती है। जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता उस घर में कभी सुख-समृद्धि नहीं होती। इस तरह के कार्यक्रम के जरिये जागरूकता आती है। हर किसी को महिला सशक्तीकरण के बारे में शिक्षित किया जा सकता है।
-सुहानी मेहरा, छात्रा
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हर महिला को यह समझने की जरूरत है कि अगर बेटी को जन्म नहीं दोगे तो बहु कहां से लाएंगे। भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों का समाधान निकाला जाना बहुत आवश्यक है। ताकि आने वाले समय में कोई भी बेटी को जन्म देते समय यह न सोचे कि कहीं हमारे घर पर बेटी जन्म न ले ले।
- जगप्रीत खालसा, छात्रा