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अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स: महिलाएं भी छू सकती हैं आकाश, बस मौके की है उन्हें तलाश

Sat, 30 Nov 2019 11:59 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Sat, 30 Nov 2019 11:59 AM IST
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Aparajita 100 Million Smiles, Those who consider daughters a burden should change their thinking
डॉ. विक्रम हांडा, प्रिंसिपल, गुरप्रीत हांडा, वाइस प्रिंसिपल - फोटो : अमर उजाला

‘अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स’ अभियान के तहत जम्मू संभाग के टाइनी टॉट्स हायर सेकेंडरी स्कूल सैनिक कॉलोनी में शुक्रवार को चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्राओं ने पेंसिल व रंगों से चित्रकारी करते हुए महिला सशक्तीकरण का संदेश दिया।

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इसके तहत छात्राओं ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, भ्रूण हत्या पर रोक जैसे मामलों पर चित्रकारी की। छात्राओं ने अपने कला-कौशल का बेहतरीन प्रदर्शन किया। वहीं भ्रूण हत्या, दहेज उत्पीड़न जैसे मुद्दों को उठाकर महिला वर्ग के लिए सुरक्षित समाज एक बुनियादी हक बताया।
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चित्रकारी प्रतियोगिता में पहला स्थान स्माइल जमवाल, दूसरा स्थान सरनजीत कौर और तीसरा स्थान खुशी ने हासिल किया। प्रतिभागी छात्राओं ने महिलाओं के साथ हो रहे भेदभाव को रंगों के जरिए बहुत ही खूबसूरती से उजागर किया। छात्राओं ने महिलाओं पर समाज में हो रहे अपराधों और शोषण के बारे में खुलकर बातचीत की।
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महिला सशक्तीकरण के लिए इस तरह के कार्यक्रमों के जरिए महिलाओं को सशक्त किया जा सकता है। स्कूलों में इस तरह की प्रतियोगिता करवाकर विद्यार्थियों को समाज से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों के बारे में जागरूक कर समाज में नई चेतना जगाई जा सकती है। -डॉ. विक्रम हांडा, प्रिंसिपल

 

जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए

वर्तमान में महिलाएं हर क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं। नारी अब अबला नहीं रह गई है, वह हर चुनौती से लड़कर प्रगति कर रही है। जो लोग बेटियों को बोझ समझते हैं उन्हें अपनी सोच बदलनी चाहिए। हम सभी को जागरूक होना होगा। -गुरप्रीत हांडा, वाइस प्रिंसिपल

मुझे लगता है कि इस तरह के कार्यक्रम बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे समाज में लड़कियों के प्रति नजरिया बदला जा सकता है। लोग लड़कियों को कमजोर समझते हैं पर यह नहीं जानते कि जिम्मेदारियों का बोझ पड़ने पर बेटियां ही काम आती हैं। बेटियां अब अंतरिक्ष तक पहुंच चुकी हैं। -बिसमागुल, छात्रा

महिलाओं को हर क्षेत्र में दबाया जाता है। इस कार्यक्रम के जरिए महिलाओं के प्रति नजरिया बदला जा सकता है। एक शिक्षित महिला कई परिवारों को शिक्षा से जोड़ने का काम करती है। - सरनजीत कौर, छात्रा

लड़कियां किसी भी क्षेत्र में तरक्की कर लें, लेकिन समाज से उन्हें साकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाती है। लड़कियों को आगे बढ़ने के लिए और मौके मिलने चाहिए। इस कार्यक्रम के जरिए मैं यह संदेश देना चाहती हूं कि महिलाएं कुछ भी करने में सक्षम हैं। -स्माइल, छात्रा

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