कश्मीर घाटी में फिर सक्रिय हुआ एंटी टेररिस्ट ग्रिड
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आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में उत्पन्न कानून व्यवस्था की स्थिति के चलते एंटी टेररिस्ट आपरेशनों में आई कमी को दूर करते हुए एक बार फिर सुरक्षाबलों की ओर से आपरेशन में तेजी लाई गई है। साथ ही कोशिश की जा रही है कि युवाओं को काउंसिलिंग के जरिए आतंक के पथ पर जाने से रोका जा सके।
इसके अलावा भटके युवाओं को समर्पण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।आईजी कश्मीर एसजेएम गिलानी का कहना है कि दोबारा आपरेशनों में तेजी लाई गई है। इसके नतीजे भी सामने आए हैं। बुरहान के मारे जाने के बाद 88 स्थानीय युवाओं ने आतंक का दामन थामा है।
इसके पहले 2015 में 70 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए थे। आशंका थी कि बुरहान के मारे जाने के बाद काफी संख्या में युवा आतंकी संगठनों का दामन थामेंगे, लेकिन ऐसा देखने को नहीं मिला।
नवंबर के बाद से एंटी टेररिस्ट ऑपरेशनों में आई तेजी
उन्होंने बताया कि नवंबर से दोबारा एंटी टेररिस्ट आपरेशन में तेजी लाई गई है। पिछले चार-पांच महीनों में सकारात्मक नतीजे सामने आए हैं। अब एंटी-टेररिस्ट ग्रिड दोबारा से पूरी तरह काम करने लगा है और और आतंकी गतिविधियों पर भी काफी हद तक काबू पाया गया है। कहा कि आतंकियों के छिपे होने की सूचना पर इलाके के घेराव के दौरान कोशिश रहती है कि समर्पण के लिए राजी किया जाए।
कई आपरेशन में परिवार वालों को बुलाकर समर्पण की कोशिश की गई। इसमें सफलता भी मिली। जनवरी में सोपोर में 2-3 आपरेशन में आतंकियों ने हथियार डाले थे। ज्ञात हो कि आगामी दिनों में सुरक्षा बलों को दोहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।
बर्फ पिघलने के बाद घुसपैठ की कोशिशों में तेजी आएगी, साथ ही युवाओं को आतंक के राह पर चलने से रोकना भी चुनौती होगी। युवाओं को भटकने से बचाने के लिए पुलिस-पब्लिक बैठकें आयोजित की जा रही हैं। इसमें अभिभावकों और युवाओं दोनों की काउंसिलिंग की जा रही है।